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Thursday, July 9, 2026, 12:13 pm

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सोनार किले के करीब बम मिलना : साजिश या संयोग? इतना तय- विश्व प्रसिद्ध फोर्ट की सुरक्षा खतरे में

राइजिंग भास्कर डॉट कॉम के ग्रुप एडिटर डीके पुरोहित का केंद्रीय पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री गजेंद्रसिंह शेखावत के नाम खुला पत्र

प्रिय शेखावत जी,

आप तीसरी बार जोधपुर के सांसद बने। जैसलमेर जोधपुर संभाग में ही है। वैसे भी आप अब केंद्रीय पर्यटन और संस्कृति मंत्री है और इस नाते पूरा देश आपसे ही उम्मीदों भरी नजर देख रहा है। यह पत्र हम आपको उस समय लिख रहे हैं जबकि जैसलमेर के सोनार किले के करीब यानी शिव रोड पर जीवित बम मिला है। जीवित बम मिलना साजिश है या संयोग? यह तो जांच के बाद ही पता चलेगा, मगर इतना साफ है कि जैसलमेर जैसे सोनार किले जो दुनिया में लिविंग फोर्ट है, उसके करीब जीवित बम मिलना कई सवाल छोड़ जाता है। आप केंद्रीय पर्यटन और संस्कृति मंत्री है। पर्यटन का जिम्मा आपका है। इसलिए हम आपसे संवाद कर रहे हैं।

पुलिस और तमाम सुरक्षा एजेंसियां फेल, बम का मिलना खतरे के संकेत

शेखावत साहब हमारे पत्र पर गंभीरता से गौर कीजिएगा। यह बम का मिलना सामान्य घटना नहीं है। पूरे किले और आबादी की सुरक्षा खतरे में है। ऐसा किला जो दुनिया में अपने आप में इकलौता है और देश की इकोनॉमी में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। पर्यटन की दृष्टि से जैसलमेर का यह किला दुनिया में मिसाल है। लेकिन सवाल है शेखावत साहब किले की परिधि में जीवित बम मिल जाता है और जैसलमेर का पुलिस महकमा कुछ नहीं कर पाता। तमाम सुरक्षा एजेंसियां क्या कर रही थी? जैसलमेर ऐसा शहर है जो रात में भी जागता रहता है। शायद इसी वजह से सुरक्षित है। क्योंकि पुलिस और सुरक्षा एजेंसियां तो नाकारा ही सिद्ध होती रही है। पुलिस और सुरक्षा एजेंसियों के होते हुए एक जीवित बम जैसलमेर फोर्ट के इतना करीब आ जाता है और पता नहीं चलता। लोग ही पुलिस को सूचना देते है कि बम पड़ा है। आखिर शेखावत साहब यह पुलिस महकमे की फेलियर नहीं है तो क्या है? सुरक्षा एजेंसियां जो 24 घंटे घूमती रहती है और जैसलमेर जैसे सीमावर्ती इलाके में विश्व प्रसिद्ध किले के करीब जीवित बम मिलना कई सवाल छोड़ जाता है? क्या यह सेना का बम है? अगर हां तो यहां कैसे आया? अगर आ भी गया तो पुलिस और सुरक्षा एजेंसियां क्या कर रही थी? अगर हादसा हो जाता तो कितना बड़ा नुकसान होता? इसकी कल्पना ही की जा सकती है। शेखावत साहब यह पत्र केवल आपको ही नहीं है जैसलमेर के पुलिस अधीक्षक और कलेक्टर के साथ तमाम सुरक्षा एजेंसियों को भी सावधान करने के लिए लिखा जा रहा है। जैसलमेर वैसे भी सीमावर्ती इलाका है और सोनार किला हमेशा पाकिस्तान की नजर पर रहा है। ऐसे में सवाल है कि आगे जैसलमेर के इस विश्व प्रसिद्ध फोर्ट की सुरक्षा और भविष्य के लिए क्या कदम उठाए जा सकते हैं?

सोनार किले में राजाओं के काल का बारूद कई बार फट चुका है, कई लोग मर चुके हैं

शेखावत साहब जैसलमेर का सोनार किला सुरक्षित नहीं है। यहां पहले भी दो-तीन बार बारूद फट चुका है और दर्जनों लोग जल चुके हैं जिसमें कुछ की मौत भी हो चुकी है। यह बारूद रजवाड़ा काल का है और आज भी पता नहीं कहां-कहां कितना बारूद छुपा हुआ है। सोनार किले में निर्माण होते रहते हैं और कभी भी कहीं भी छुपा हुआ बारूद फट सकता है। जब जैसलमेर में भगवानलाल सोनी एसपी हुआ करते थे तब जैसलमेर के इस किले में बारूद फटा था और दर्जनों लोग झुलस चुके थे। उसमें भी कई लोग मर चुके थे। उस समय यह रिपोर्टर जैसलमेर में हिन्दुस्तान का संवाददाता हुआ करता था। शेखावत साहब आप पर्यटन मंत्री है और आप पर इस किले को बचाने की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी है। सबसे पहले तो यह काम कीजिए कि विशेष टीम लगाकर पता लगवाइए कि सोनार किले में कहां-कहां बारूद हो सकता है? क्योंकि बारूद के ढेर पर सोनार किला खड़ा है। ऐसे हादसे कभी भी हो सकते हैं और उससे सोनार किले की सुरक्षा के साथ-साथ यहां रहने वाले 5 हजार से अधिक लोगों की सुरक्षा भी खतरे में है।

क्या फोर्ट खाली हो सकता है? लोगाें से बात करें- सारी संभावनाएं तलाशें

शेखावत साहब दुनिया की आंखों का नूर यह सोनार किला आबादी वाला किला है। यहां करीब 5 हजार लोग रहते हैं। अब तो हालत यह हो गई है कि ये 5 हजार लोग पर्यटन गतिविधियों से अधिकतर जुड़े हैं और उनका रोजगार भी पर्यटन पर टिका है। इसलिए यहां के लोग किला खाली नहीं करना चाहते। दूसरा यहां रहने वाले लोगों का कहना है कि यह उनकी परंपरा, विरासत और संस्कृति से जुड़ा मामला है और उनकी किले के साथ भावनाएं जुड़ी हुई है, इसलिए किला खाली करवाना आसान नहीं है। लेकिन शेखावत साहब आप जैसलमेर आएं और जैसलमेर के लोगों के साथ पुलिस और प्रशासन के साथ पुरातत्व विभाग के अधिकारियों को शामिल करते हुए मंथन करें। प्रयास करें कि किले की सुरक्षा को लेकर क्या कदम उठाए जा सकते हैं?

किले में मंडरा रहा खतरा : कभी भी सिलेंडर फट सकता है, वाहनों में दुर्घटना हो सकती है

शेखावत साहब किला आबादी वाला है। यहां 5 हजार से अधिक लोग रहते हैं। रोज सैकड़ों वाहन आते-जाते हैं। पुलिस ने यहां यातायात पुलिस के कर्मियों को लगा रखा है जो एक निश्चित समय तक सैलानियों को वाहनों के साथ अंदर नहीं जाने देते। लेकिन ये ट्रैफिक पुलिसकर्मी भी अपने फर्ज के साथ न्याय नहीं करते। सैलानियों से पैसे लेकर उनके वाहनों को अंदर जाने देते हैं और आम आदमी को रोकते हैं। ऐसे में कइ बार झगड़े भी होते हैं। शेखावत साहब मुद्दा फिलहाल यह नहीं है। हम जो आपको बात बताने जा रहे हैं वह काफी गंभीर है और पूरा जैसलमेर और पूरा देश आपसे आशा भरी नजरों से देख रहा है। इस किले में आबादी रहती है। निसंदेह लोग सिलेंडर का उपयोग करते हैं। यहां होटलें भी है और कॉमर्शियल गतिविधियां भी होती है। ऐसे में कॉमर्शियल सिलेंडर भी उपयोग में लिए जाते हैं। ऐसे में कभी भी सिलेंडर फट सकता है। ऐसा होता है तो धमाके से सोनार किले की इमारतों और घरों के साथ जन हानि भी हो सकती है। इसलिए लोगों की सुरक्षा को देखते हुए किला खाली करवाने की संभावनाओं पर विचार किया जा सकता है। शेखावत साहब किले में चूंकि वाहन आते जाते रहते हैं इसलिए कभी भी किले की प्रोल के भीतर भी एक्सीडेंट हो सकते हैं और दीवारों को खतरा पहुंच सकता है। गौरतलब है कि जब जैसलमेर में भगवानलाल सोनी एसपी हुआ करते थे तब किले की एक दीवार गिर भी चुकी है और कुछ लोग दब कर मर गए थे। ये परिस्थितियां हमारे सामने है। इसलिए संभव हो तो किला खाली करवा लेना चाहिए। हालांकि जैसलमेर के लोग कभी तैयार नहीं होंगे, लेकिन फैसला आपको और होम मिनिस्टर स्तर पर करना है। इसलिए शेखावत साहब जितना जल्दी हो सके जैसलमेर के इस लिविंग फोर्ट के बारे में निर्णय लीजिए। ताकि जैसलमेर का सोनार किला सुरक्षित हो सके।

किले का ड्रेनेज सिस्टम फेल, पानी नींवों में जा रहा, भविष्य में कभी भ्री भरभरा कर गिर सकता है

शेखावत साहब चूंकि जैसलमेर का किला आबादी वाला किला है, इसलिए यहां लोगों ने पानी के कनेक्शन भी ले रखे हैं और रोज बड़ी तादाद में पानी छोड़ा जाता है। यहां का ड्रेनेज सिस्टम सफल नहीं रहा है। पहले भी मीडिया रिपोर्ट में इसका खुलासा किया जा चुका है। किले से जो पानी की निकासी होती है उसका पानी किले की नींवों में जा रहा है। ऐसे में किला कभी भी भरभरा कर गिर सकता है। इसलिए किले की लॉन्ग लाइफ और लोगों की सुरक्षा के लिए किला खाली करवाना जरूरी हो गया है।

दूसरे गेट की संभावना बनी है, पर यह मौलिकता के साथ खिलवाड़ होगा

शेखावत साहब प्रशासन ने तय किया है कि किले की आबादी बढ़ गई है और लोगों का बड़ी मात्रा में आना जाना रहता है और वाहन आते जाते हैं इसलिए किले के दूसरे गेट की संभावना बनी है। मगर शेखावत साहब ऐसा करना किले की मौलिकता के साथ खिलवाड़ करना होगा। इसलिए एक बार आप पूरी रिपोर्ट तैयार करवाएं। जैसलमेर आएं और जैसलमेर के बुद्धिजीवियों और जिम्मेदार लोगों के साथ बात करके किले की सुरक्षा और इसके भविष्य की दिशा तय कीजिए।

किले के लोगों को गेट पास दें, हर आने-जाने वाले की एंट्री हो, समीप की चौकी नाकारा?

जैसलमेर के किले में कोई भी आसानी से आ जा सकता है। किसी को रोका नहीं जाता। अब जबकि बम मिल चुका है और अब तय है कि किले के प्रति खतरा मंडरा रहा है। किले में आने जाने वाले संदिग्ध लोगों की भी पहचान नहीं हो पाती। होना यह चाहिए कि किले के गेट पर ही एक ऑफिस खोला जाना चाहिए और हर आने-जाने वाले की रजिस्टर में एंट्री होनी चाहिए। किले में रहने वाले लोगों को गेट पास दिए जाने चाहिए। रजिस्टर में बाकायदा लिखा जाना चाहिए कि कौन कितने बजे आया, किससे मिला, कब वापस गया, क्या सैलानी है? क्या मोबाइल नंबर है? उसकी पहचान का प्रमाण भी ले सकते हैं, कहां से आया और अन्य बातें भी नोट की जानी चाहिए। यह किले की सुरक्षा के लिए जरूरी है। किले के समीप ही पुलिस चौकी है, मगर वह भी नाकारा है। पुलिस चौकी में कभी मामले आते ही नहीं है। यह दिखावा भर रह गई है। पुलिस चौकी के कर्मचारी मजे करते हैं और उनके होते हुए भी किले के करीब बम मिल जाता है तो ऐसी चौकी का होने का मतलब ही क्या? चौकी के कर्मचारी गोपा चौक में गपे मारते रहते हैं।

Dilip Purohit
Author: Dilip Purohit

Group Editor