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Thursday, July 9, 2026, 5:50 am

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Lifestyle

संस्मरण : अपेक्स हॉस्पिटल में मेरे तीन दिन

लेखक :  नाचीज बीकानेरी

ईश्वर ही अपने बंदों को अमीरी गरीबी, सुख सुविधा, हारी बीमारी आदि इस दुनिया ए फानी में नेमत समझकर ये जीवन देता है। इंसानों को ऐसे में इस जीवन को कुबूल करना चाहिए।
फिर भी अल्लाह का फरमान है कि इंसान को अपनी छोटी बड़ी जो भी बीमारियां जब भी आती है उनकी देखभाल/ हिफाजत के लिए डॉक्टर /हकीम/ वैद्य के पास जाकर इलाज कराना चाहिए। इसी सिलसिले में, मैं भी बीकानेर के”अपेक्स हॉस्पिटल”
में बीमारी के सिलसिले में पहुंचा । वहां आवश्यक जांच की प्रक्रिया शुरू हुई और ऐसा लग रहा था कि इस अस्पताल की मैनेजमेंट व्यवस्था, स्टाफ की प्रक्रिया बहुत ही स्टेप बाय स्टेप होने लगी। राजस्थान के सुप्रसिद्ध सर्जन, रंगकर्मी डॉक्टर तनवीर मालावत के पास गया तब उन्होंने कहा कि आइए कवि महोदय क्या बात है ! सुनाइए, एक ही नजर में कहा रिपोर्ट मैंने देख ली है आज ही आपका ऑपरेशन कर देगें। एडमिट लिखते हुए बोले आप साहित्य से जुड़े व्यक्ति हो आपकी संवेदनाएं निश्चित ही इस अस्पताल की व्यवस्था पर जरूर पड़ेगी आशा है आप हमारी हॉस्पिटल की जो भी कमियां, स्टाफ व्यवहार आदि है पर आप दृष्टिपात करेंगे, अभी तो मैं क्या लिखूं मुझे खुद ही अपनी तकलीफ पर काबू नहीं हो रहा है एक डॉक्टर को मरीज के साथ जो व्यवहार होना चाहिए वह मित्रवत था।
एडमिट करने की प्रक्रिया करने के बाद तुरंत ही ऐसी प्रक्रिया चली की सारी कार्रवाई सारे टेस्ट की प्रक्रियाएं सम्पन्न हुई । फिर मुझे देखते ही देखते ऑपरेशन थिएटर लाया गया ऑपरेशन थिएटर लाने के बाद मुझे कोई पता नहीं चला, क्या हुआ ? जब ओटी से मुझे वार्ड में सिफ्ट किया ऑपरेशन के बाद जो भी प्रक्रिया होती है वह सारी प्रक्रिया धीरे-धीरे होने लगी और वार्ड के जितने भी कंपाउंडर, नर्स, वार्ड बॉय और छोटे-बड़े कर्मचारी लगातार एक रूटीन चेकअप जैसे भी होता है वह अपने आप हो रही थी टेस्टिंग, बीपी, शुगर, नर्व सिस्टम की इनफॉरमेशन फाइल हो रही थी और मेरे दो दिन यानी 48 घंटे तक गैस पास नहीं हुआ तब तक ड्रिप चढ़ रही थी और मुझे चेक करने आते थे। इसी तरह से अन्य बीमारियों के डॉक्टर भी मरीजों को देख रहे थे और अस्पताल में इतनी भीड़ को देखकर मुझे ऐसा लगा की क्या पूरा भारत ही बीमार है।
ऑपरेशन के बाद नजदीकी रिश्तेदारों की रेलमपेल मरीजों की मिजाज पुरसी के लिए आते ही है और कर्मचारियों को कहना ही पड़ता है एक मरीज के पास एक ही बंदा रहे फिर भी सिलसिला जारी रहा और मुझे ऐसा लगा की डॉक्टर से लेकर नर्सिंग स्टाफ और सफाई कर्मचारी भी अपनी तत्परता से सेवाएं दे रहे थे और जितने भी जो छोटे कर्मचारी है उनका नजरिया यही रहता था की सेवा करेंगे तो हमें भी कुछ इसका लाभ मिलेगा और बीकानेर के लोगों की तासीर में सेवा करने वाले कर्मचारियों का मान सम्मान करने की भावना होती ही हैं, कम पगार तो है लेकिन कर्मचारी संतुष्ट थे । सम्मान से ही मुझे अस्पताल से विदा करने में जो उनकी भावना व मेरे प्रियजनों की खुशी से लगता है स्ट्रेचर पर लाने के बाद कर्मचारी को खुश करने में सबके हाथ जेब की ओर बढ़ते ही देखी है।
सरकारी अस्पतालों में ये सभी सुविधाए उपलब्ध होती हैं लेकिन सुपरविजन की कमी, योग्य कर्मठ स्टाफ होते हुए भी कार्य में उदासीनता, लापरवाही, जबाबदेही न होने की प्रवृत्ति से लोगों का सरकारी तंत्र से विश्वास उठ रहा है, जिसका खामियाजा आम जनता को भुगतना पड़ता है।
जैसी व्यवस्था निजी फायदे वाली हॉस्पिटल में लोगों को मिलती है यदि सभी संसांधन होते हुए भी सरकारी अस्पतालों में आम लोगों को सुविधा उपलब्ध कराई जाए, कर्तव्य के प्रति सजग रह कर व्यवस्था मिले तो लोगों को अधिक खर्च से बचाया जा सकता है। जो इलाज सरकारी अस्पतालों में महीने में होता है वह इलाज प्राइवेट हॉस्पिटल में लिमिट टाइम पीरियड में हो जाता है। वर्तमान में सरकारी कर्मचारी, पैंशनर, सरकार ने जो योजनाएं शुरू की है चिरंजीवी हो या आयुष्मान हो उनसे आम लोगों को भी राहत मिल रही है इन योजनाओं से निजी फायदे वाली हॉस्पिटल में लोगों का जुड़ाव बढ़ा है । दूर दराज के लोगों को देख कर हर किसी संवेदना होती है कि इस अस्पताल के आसपास भी धर्मशाला, सराय जैसी व्यवस्था भी हो तो मरीजों के परिवार जन आराम कर सकते हैं। छोटी जगह में सात तला बिल्डिंग सभी सुविधाओं का लाभ आम जन को अस्पताल से मिल रहा है।
मैं यहां डॉक्टर तनवीर मालावत जो कि बीकानेर के जाने वाले डॉक्टर हैं, जिन्होंने बीकानेर में कई कीर्तिमान स्थापित किए हैं। एक अच्छे रंगधर्मी है । डाॅ मालावत्त सिफर से शिखर तक अपनी मेहनत, लग्न, कर्तव्य निष्ठा के पुजारी साधारण परिवार से आज उठकर बीकानेर को जो स्वास्थ्य शिक्षा ,स्वास्थ्य सेवा का जो कीर्तिमान स्थापित किया है, उसका बीकानेर सदा ऋणी रहेगा इसी प्रकार से बीकानेर के सभी डॉक्टर भी अपनी सेवाएं अपने ज्ञान अपना तजुर्बा अपना समय यदि आम दुखी परिवारों को निशुल्क कैंप लगाकर निशुल्क सेवाएं देने का शिविर पखवाड़ा लगाने का प्रयास करें तो पुण्य का काम होगा।
लोग कहते हैं कि डॉक्टर भी भगवान का रूप होता है पर भगवान तब कहेंगे जब व्यक्तिगत हित त्याग करेंगे। मुझे शनिवार की दोपहर को भर्ती किया गया मंगल दोपहर को पांच दिन का ट्रीटमैंट देकर डिस्चार्ज किया गया । अल्लाह हमें स्वस्थ रखे स्वास्थ्य ही धन है। सादा खाओ उच्च विचार रखो, इसलिए बचपन से सुनते आए हैं ” पहला सुख निरोगी काया।”ये दिन याद रहेगा ।

Dilip Purohit
Author: Dilip Purohit

Group Editor