राइजिंग भास्कर डॉट कॉम. जोधपुर
बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ योजना के अंतर्गत जिला स्तर पर माहवारी स्वास्थ्य एवं स्वच्छता प्रबंधन और एनिमिया से संबंधित जानकारी प्रदान करने के लिए एक दिवसीय कार्यशाला का आयोजन किया गया। यह कार्यशाला अरबन हाट, पाली रोड, जोधपुर में आयोजित हुई, जिसमें 45 किशोरियों ने सक्रिय भागीदारी की।
एनिमिया कारण, प्रभाव और रोकथाम पर चर्चा
कार्यशाला में किशोरियों को जेण्डर स्पेशलिस्ट कानाराम सारण ने एनिमिया की परिभाषा, इसके कारण, शरीर पर इसके प्रभाव, उपचार एवं रोकथाम के बारे में जानकारी दी। उन्होंने किशोरियों को एनिमिया से बचने के लिए आवश्यक खान-पान और स्वास्थ्य संबंधी उपायों को विस्तार से बताया।
युवावस्था और स्त्री प्रजनन प्रणाली पर जानकारी
डॉ. मोनिका ने युवावस्था के दौरान होने वाले शारीरिक और मानसिक परिवर्तनों, स्त्री प्रजनन प्रणाली, माहवारी चक्र और इससे संबंधित अन्य महत्वपूर्ण जानकारियां किशोरियों को दीं। उन्होंने युवावस्था में ध्यान रखने योग्य स्वच्छता और स्वास्थ्य उपायों पर भी प्रकाश डाला।
माहवारी से जुड़े मिथक और सच्चाई
डॉ. किरण शर्मा ने माहवारी से जुड़े विभिन्न सामाजिक मिथकों और उनके पीछे की सच्चाई पर चर्चा की। उन्होंने बताया कि माहवारी से जुड़ी गलत धारणाओं को दूर करना आवश्यक है ताकि किशोरियां मानसिक और शारीरिक रूप से स्वस्थ रह सकें।
माहवारी सामग्री और स्वच्छता प्रबंधन
एएनएम हेमलता गहलोत ने किशोरियों को माहवारी के दौरान उपयोग होने वाली सामग्री, जैसे सैनिटरी नैपकिन के स्वच्छता से उपयोग और उचित प्रबंधन की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि सैनिटरी नैपकिन के सही तरीके से निस्तारण का भी विशेष ध्यान रखना चाहिए।
उड़ान योजना के तहत सैनिटरी नैपकिन का वितरण और उचित निस्तारण
सुपरवाइजर पूजा सोलंकी ने उड़ान योजना के अंतर्गत सैनिटरी नैपकिन की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि इस्तेमाल किए गए पैड को कागज में लपेटकर उचित निस्तारण करना चाहिए। इसके अलावा, उन्होंने गड्डे में पैड को दबाने जैसी निस्तारण विधियों के बारे में भी जानकारी दी।
माहवारी के दौरान पोषण और स्वास्थ्य
सुपरवाइजर नीतू सिंह ने माहवारी के दौरान पोषण और स्वास्थ्य पर चर्चा की। उन्होंने बताया कि इस समय किशोरियों को विशेष पोषण और स्वच्छता का ध्यान रखना चाहिए ताकि वे स्वस्थ रह सकें और एनिमिया जैसी बीमारियों से बच सकें। इस कार्यशाला का उद्देश्य किशोरियों को माहवारी स्वास्थ्य और स्वच्छता प्रबंधन के साथ-साथ एनिमिया जैसी गंभीर बीमारी के प्रति जागरूक करना था।
