दिल्ली हाईकोर्ट के घर मिले नोटों पर वरिष्ठ अधिवक्ता एनडी निंबावत ‘सागर’ की टिप्पणी
दिल्ली हाईकोर्ट के जज जस्टिस यशवंत वर्मा के घर से मिले नोटों की आग कहां तक पहुंचेगी ये तो हवा के रुख पर निर्भर करती है और हम सभी जानते है हवा का रुख तो बदलता रहता है, पता नहीं चलता। हां वर्तमान समय में तकनीकी विकास के चलते मौसम विभाग हवा के रुख की भविष्यवाणी सही-सही करने में सफल हो रहा है लेकिन यहां विभाग दूसरे हैं । दो-चार दिन और अखबारों में यह मुद्दा छाया रहेगा । हम जानते है हमारे देश में हर दूसरे-तीसरे दिन एक नया मुद्दा आ जाता है और समाचार पत्र वाले उस नए मुद्दे को जनता तक पहुँचाने में लग जाते हैं और पुराना मुद्दों पर समय की धूल जमने लग जाती है और फिर लोग भूल जाते हैं उस मुद्दे को । इस बात पर मेरा एक शे’र याद आ रहा है-
“हर एक नया ज़ख्म दवा बन जाता है “सागर”
पुराने हर ज़ख्म की, अब कहाँ याद रहेगें पुराने ज़ख्म”
विषय ये कितना गंभीर है ये सोचने वाली बात है कि यदि न्यायपालिका में भी ऐसी घटनाएं होने लगी तो आम आदमी का न्यायपालिका से विश्वास उठ जायेगा। वैसे भी पेचीदे कानून और न्यायालय में लगने वाले समय से आम आदमी त्रस्त है । समय-समय पर न्यायपालिका पर लग रहे आक्षेप लोगों के न्यायपालिका पर के विश्वास पर चोट का कार्य करते हैं । जस्टिस वर्मा के घर नोटों का मिलना भले ही जांच का विषय हो, लेकिन जांच करने वाले एवं निर्णय लेने वाले भी तो उसी श्रेणी के हैं। इसी संदर्भ में मेरी कविता की कुछ पंक्तियां याद आ रही है-
“दामन तो यहां सभी का दागदार है,
गोया कि इन सबका चेहरा शानदार है ।
जो पकड़ा गया वो ही तो चोर है यहां,
बाकी तो “सागर” यहां सभी ईमानदार है ।।”
