-मजबूरी में कब्रों पर ताला लगाकर रखते हैं हिंदू माता-पिता, नाबालिग और जवान लड़कियों की इज्जत सुरक्षित नहीं, जिहाद के नाम पर हिंदुओं पर हो रहे अत्याचार, पाकिस्तान में हिंदू होना भी बना अभिशाप, हिंदुओं की ना संपत्ति सुरक्षित ना सम्मान, पिछले पांच दशक में हजारों हिंदुओं ने किया भारत की ओर पलायन, ऐसे जुल्म कि सुनते-सुनते रोंगटे खड़े हो जाए…
डीके पुरोहित की विशेष रिपोर्ट. इस्लामाबाद
पाकिस्तान में हिंदू होना अभिशाप हो गया है। हिंदुओं की जीवित तो जीवित मृत बेटियां भी सुरक्षित नहीं है। वहां पर हिंदू बेटियों को कब्र में भी चैन नहीं है। वहशी दरिंदे जिहाद के नाम पर मृत बेटियों को कब्र से निकालकर ले जाते हैं और उनके साथ बलात्कार करते हैं। रिपोर्ट है कि जिहादियों ने हिंदुओं को परेशान और प्रताड़ित करने के साथ जुर्म के नए-नए तरीके इजाद कर लिए हैं। उनकी सपंत्ति तो संपत्ति सम्मान भी सुरक्षित नहीं है। दुनिया भर के मानवाधिकार संगठन खामोश है। कोई बोलने वाला नहीं है। हालत यह है कि हिंदू माता-पिता को अपनी मृत बेटियों की कब्र पर भी ताला लगाना पड़ता है।
आए दिन पाकिस्तान में नाबालिग बच्चियों को उठा कर जिहादी ले जाते हैं और उनके साथ रेप करते हैं। जवान बेटियां अपनी इज्जत बचाने के लिए शाम होते ही घर से बाहर नहीं निकलती। ये स्थिति आज से पांच दशक पहले ही नहीं आज भी है। रिपोर्ट के मुताबिक हिंदू घरों के आस-पास जिहादी नजर रखते हैं। उनके बारे में पूरी जानकारी हासिल करते हैं और जैसे ही उन्हें मौका मिलता है बेटियों को उठा ले जाते हैं। इन बेटियों के साथ-साथ महीनों-महीनों रेप होता है। हिंदू माता-पिता ये आतंक सहने को अभिशप्त है। पिछले पांच दशक में हजारों हिंदू परिवार जैसलमेर, बाड़मेर, जोधपुर, बीकानेर, जयपुर और दिल्ली में शरण लिए हुए हैं। इन शरणार्थियों की व्यथा का कोई पार नहीं है। अगर इनकी कहानियां सुनी जाए तो रोंगटे खड़े हो जाएं। पाकिस्तान के जिहादियों का नाम कोई धर्म है और ना ही कोई ईमान। वे व्याभिचार में अपनी शान समझते हैं। जुर्म और अत्याचार के मारे हिंदुओं का भारत की ओर पलायन के अलावा कोई रास्ता नहीं बचा है।
आज से कोई पच्चीस साल पहले अधिकतर हिंदू परिवार इन्हीं जुल्मों से तंग आकर भारत आकर बस गए। ये स्थिति आज भी कायम है। जेहादियों का एक ही काम है हिंदुओं पर अत्याचार। हिंदू परिवार भय के साए में जी रहे हैं। पाकिस्तान के जेहादी मानसिक रूप से वीभत्स बीमारी से ग्रस्त है। बताया जाता है कि वर्दी नैक्रोफीलिया यानी मृत शरीर के साथ सेक्स में उन्हें मजा आता है। यह बीमारी उनकी रगों में है। जिहादियों को बचपन से ही 72 हूरों के सपने दिखाए जाते हैं। उन्हें व्याभिचार के लिए प्रोत्साहित किया जाता है। जीवित हो या मृत उन्हें सेक्स के लिए लड़कियां चाहिए। ऐसे में कब्रों में भी बेटियां सुरक्षित नहीं है।
रिपोर्ट के मुताबिक हिंदू माता-पिता अपनी बेटियों की कब्र पर ताला लगाकर रखते हैं ताकि शवों के साथ गलत काम ना हो। जेहादियों की पहली पसंद नाबालिग बेटियां होती है। जितनी बच्ची छोटी होती है उतना ही उन्हें आनंद आता है। निर्लजता की हद तो तब है जब नाबालिग बेटियों के शवों के साथ जेहादी बलात्कार करते हैं। उनका ना ही कोई चरित्र हैं और ना ही कोई धर्म। केवल और केवल जिहाद के नाम पर सेक्स उनकी जरूरत बन गई है। इसके लिए वे कुछ भी करने को तैयार रहते हैं।
शवों को खरीदने के लिए लाखों रुपए का देते हैं लालच
बताया जाता है कि जिहादी जबरदस्ती तो करते ही हैं। ऐसे भी मामले सामने आने लगे हैं कि जेहादी हिंदुओं की बेटियों के शवों का भी सौदा करने लगे हैं। लाखों रुपए देकर वे मृत बेटियों के शव खरीदते हैं और उनके साथ महीनों-महीनों बलात्कार कर अपनी आग ठंडी करते हैं। गरीब हिंदू परिवार एक तरफ जुल्मों के शिकार हैं तो दूसरी ओर उनकी गरीबी के चलते उन्हें पैसों का लालच देकर उनकी बेटियों का सौदा कर लेते हैं। खासकर मृत बेटियों के शव खरीद कर उनके साथ अपनी वासना शांत की जाती है। इस संबंध में कोई सुनने वाला नहीं है। वहां की सरकार भी मौन है। जेहादी पहली बात तो सरकार की सुनते ही नहीं है। ऐसे में ना कानून का डर है और ना ही सजा की चिंता। मानवाधिकार की बातें करने वाले अंतरराष्ट्रीय संगठनों के पास रिपोर्ट होने के बावजूद आवाज उठाने वाला कोई नहीं है।
पाकिस्तान के एक लेखक का दर्द : हिंदू बेटी होने की मिलती है सजा
पाकिस्तान के एक लेखक की डायरी से खुलासा हुआ है कि वहां हिंदू परिवार में बेटी होना अभिशाप माना जाता है। बेटियां सुरक्षित नहीं होने की वजह से अपने आप को सजा देने को तैयार रहती है। वहां भी हिंदू परिवारों में बेटियों की भ्रूण हत्या के मामले बढ़ रहे हैं। पाकिस्तान के सिंध, बलूचिस्तान, मीठी, इस्लामाबाद, रावलपिंडी, कराची और कई शहरों में स्थितियां तेजी से बदली है। मीठी जैसे हिंदुओं की बहुतायत आबादी वाले शहर में अब मुस्लिम आबादी बढ़ने लगी है। यहां के परिवार बेटियों को जन्म होते ही अफीम खिलाकर मार देते हैं। कई मामलों में कोख में ही बेटियों को मार दिया जाता है ताकि उनकी इज्जत सुरक्षित रह सकें। लेकिन हालात यह है कि मृत बेटियों के शव भी सुरक्षित नहीं है। हिंदू परिवार दहशत में जीवन यापन कर रहे हैं। लेखक ने अपनी कहानी ‘माफ करना बेटी’ में कई किस्सों के माध्यम से हिंदू परिवारों की मृत बेटियों के साथ होने वाले सेक्स और अत्याचार को उठाया है। यह मुद्दा कभी इंटरनेशनल नहीं बनता।
मुस्लिम देशों में सप्लाई होती है बेटियां
हालात यह है कि रिपोर्ट के मुताबिक हिंदुओं की नाबालिग और जवान बेटियों को अपनी हवस का शिकार बनाने के लिए महीनों महीनों रेप करने के बाद उन्हें मुस्लिम देशों में सप्लाई किया जाता है। पिछले दो दशक में अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मुद्दा उठने के बाद भी स्थिति में बदलाव नहीं आया है। मुस्लिम देशों में हिंदू बेटियों की डिमांड रहती है। एक तरफ उनके शव भी सुरक्षित नहीं है तो उनका जिंदा रहना भी खतरे से खाली नहीं है। कई मुस्लिम देशों की डिमांड हिंदुओं की बेटियां रहती है। हिंदू बेटियों पर जेहादी बुरी नजर रखते हैं और जब देखो तब उनका अपहरण कर लिया जाता है। एक मानवाधिकार संगठन ने कुछ समय पहले आवाज उठाई थी मगर वह भी कुछ कर नहीं पाया। भारत में आजादी के बाद सेकुलर सरकार के ठेकेदारों ने कभी इस ओर ध्यान नहीं दिया। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इस दिशा में अपनी चिंता जता चुके हैं। मगर वैश्विक स्तर पर यह कभी मुद्दा नहीं बनता। एेसे में पाकिस्तान में हिंदू परिवारों पर अत्याचार बढ़ते ही जा रहे हैं।
पांच दशक में 22 प्रतिशत शरणार्थियों ने इसी कारण किया भारत का रुख
एक रिपोर्ट के मुताबिक पिछले पांच दशक में जो हिंदू परिवार भारत आकर बसे उनमें से 22 प्रतिशत शरणार्थियों के साथ यही समस्या रही। अपनी बेटियों की इज्जत बचाने के लिए उन्हें भारत की तरफ रुख करना पड़ा। ना हिंदुओं की बेटियां जीवित सुरक्षित है और ना ही मरने के बाद उनके शव सुरक्षित। पाकिस्तान में उनकी आवाज भी नहीं सुनी जाती। जेहादियों के जुल्मों से तंग आकर आज भी हिंदू परिवार भारत आकर बसना पसंद करते हैं। भारत में आकर बसे शरणार्थियों की राम कहानी लगभग समान है। कोई अपनी बहन बेटियों की इज्जत बचाने के लिए भारत आए तो कोई अपनी संपत्ति और पैसे लेकर भारत भाग आए। वहां हिंदुओं के साथ होने वाले भेदभाव और जुल्मों की दास्तां काफी लंबी है। यह रूह कंपाने वाली भी है। भारत में सरकारों ने इन शरणार्थियों को वोट बैंक ही समझा। कभी उनकी पीड़ा और जख्मों पर मरहम लगाने का काम नहीं किया। अंतरराष्ट्रीय मंचों पर भी उनकी पीड़ा को स्वर नहीं मिलता।
आठ माह से नाबालिग बेटी के लिए न्याय मांग रहा हिंदू परिवार
हिंदू बच्चियां पाकिस्तान में कितनी सुरक्षित है इसका ताजा उदाहरण सामने है। एक हिंदू परिवार आठ माह से अपनी नाबालिग बेटी को न्याय दिलाने के लिए कानून की चौखट पर भटक रहा है मगर पाकिस्तान में उसकी सुनवाई नहीं हो रही। वहां का कानून खुद जेहादियों से मिलीभगत करता है? इसके भरोसे अपनी बच्चियों की सुरक्षा करना बेमानी है। खबर पलवल से है, जहां एक नाबालिग का जेहादी हैवानों ने अपहरण कर लिया और उसके साथ एक माह तक दरिंदगी करते रहे। नाबालिग का अश्लील वीडियो भी आरोपियों ने बना लिया.
बताया जा रहा है कि आरोपी 2 अक्टूबर 2022 को नाबालिग को उटावड़ पुलिस को सौंप कर चला गया। आरोप है कि पुलिस ने बेटी को डरा-धमका कर कोर्ट में 164 सीआरपीसी के तहत गलत बयान दर्ज कराकर उसे बाल सरंक्षण गृह भेज दिया। वहां से आने के बाद नाबालिग ने अपनी मां को पूरी बात बताई। इसके बाद मां ने कोर्ट का दरवाजा खटखटाया. कोर्ट के आदेश पर उटावड़ थाना पुलिस ने सात लोगों के खिलाफ केस दर्ज आरोपियों की तलाश शुरू कर दी है। मां ने अदालत में दायर मामले में कहा कि 1 सितंबर 2022 को उनकी नाबालिग बेटी के साथ दो युवकों ने दुष्कर्म कर अश्लील वीडियो बना लिया. फिर उसे वायरल करने की धमकी देकर 4 सितंबर 2022 को इंसाफ, मुस्तफा, मुनफैद, साकिब, नाजिम, अलताफ व साबिर उनकी बेटी को गाड़ी में अपहृत कर ले गए. इसके बाद सभी आरोपियों ने उसके साथ दुष्कर्म कर अश्लील वीडियो भी बना ली. फिर बेटी को साबिर के हवाले कर दिया. पीड़िता ने बेटी के लापता होने की सूचना उटावड़ थाना पुलिस को दी थी, लेकिन उसने कोई कार्रवाई नहीं की।
इसलिए करती थीं हिंदू रानियां जौहर
भारत पर प्राचीन काल में मुस्लिम आक्रांताओं के जुल्म होते रहे हैं। मुस्लिम आक्रांता हिंदू परिवारों की बेटियों के साथ बलात्कार करते थे और जुल्म ढाते थे। और तो और अगर कोई हिंदू राजा युद्ध में मारा जाता था तो उनकी रानियां सामूहिक रूप से जौहर कर देती थी। इसके पीछे मूल उद्देश्य यह था कि उनके साथ गलत काम ना हो। वे अपने आप को अग्नि के हवाले इसलिए करतीं थी ताकि उनके शव के साथ भी खोटा काम ना हो सके। हिंदुस्तान में हिंदू रानियों के जौहर के अनेक किस्से भरे पड़े हैं। इतिहासकार नंदकिशोर शर्मा बताते हैं कि जैसलमेर में भी हिंदू रानियां जौहर कर चुकी हैं। चित्तौड़ के हिंदू शासक की रानियां भी जौहर कर चुकी हैं। यह स्थिति राजपूत राजाओं की रानियों के साथ होना आम रही है। हिंदू रानियां निडर रही है। वे मौत को गले लगाने से कभी पीछे नहीं रही। खासकर रानियों के मृत शरीर के साथ खोटा काम कर उन्हें अपवित्र नहीं किया जा सके, इसलिए उनके सामने जौहर के अलावा कोई चारा नहीं होता था। भारत पर जब-जब मुस्लिम आक्रांताओं ने हमले किए यहां की हिंदू रानियों ने अपने आप को खत्म करने की ठान ली। वे सामूहिक रूप से अग्नि को अपना शरीर हवाले कर देतीं और मौत को गले लगा लेंती। इतिहास के अनेक किस्से हिंदू रानियों की मनोदशा को चित्रित करती हैं। विश्व हिंदू परिषद के एक कार्यकर्ता ने बताया कि पाकिस्तान में हिंदू परिवारों को अपने स्वाभिमान के लिए लड़ना पड़ रहा है। ना केवल उनकी रोजी रोटी छीनी जा रही है, वरन उनकी बेटियों की इज्जत के साथ भी खिलवाड़ हो रही है।
