सृजन कला समिति प्रयागराज की प्रस्तुति के साथ सम्पन्न हुआ पांच दिवसीय ओम शिवपुरी नाट्य समारोह
शिव वर्मा. जोधपुर
बदलते समय ने सबसे बड़ा नुक़सान जो हमें पहुंचाया है वो ये है कि हम अब सच्चाई से ज़्यादा चमत्कारों पर यक़ीन करने लगे। सही या ग़लत का विश्लेषण किये बग़ैर जो दिखाया जा रहा है उसी पर यक़ीन करने लगते हैं। मशहूर नाटककार ‘अलखनंदन‘ द्वारा 1837 में डेनमार्क में छपी एक लोक कथा पर आधारित नाटक ‘‘ग्लोबल राजा तीन डकैत‘‘ अर्थात् राजा बूटीफुल, बहुराष्ट्रीय कम्पनियों द्वारा अधिकांश कुटीर व लघु उद्योग पर व विश्व के बढ़े बाजारों द्वारा छोटे बाजारों पर किये जा रहे ग्लोबल हमले को व्यवस्थित ढंग से प्रस्तुत करता है। इसका मंचन आकादमी सचिव डाॅ. सरिता फिड़ौदा के नेतृत्व में पश्चिम क्षेत्र सांस्कृतिक केन्द्र उदयपुर तथा उत्तर मध्य क्षेत्र सांस्कृतिक केंद्र प्रयागराज द्वारा राजस्थान संगीत नाटक अकादमी जोधपुर के सहयोग से 32वें ओम शिवपुरी स्मृति राष्ट्रीय स्तरीय नाट्य समारोह के पांचवे और अन्तिम दिन रविवार को जयनारायण व्यास स्मृति भवन, टाउन हाॅल में हुआ।
सृजन कला समिति प्रयागराज के बैनर तले मंचित इस नाटक में राजा रेशमलाल अपनी प्रजा के प्रति असंवेदनशील है और अपने राजशाही सुख के लिए उनकी समस्याओं को दरकिनार करता है। रेशमलाल अपने पहने हुए कपड़ों से बहुत जल्द ऊब जाता है इसलिए हर 2 मिनट पर वो नए कपड़े पहनता है। इसी बीच उसे ख़बर मिलती है कि पड़ोसी देश के राजा देशबंधु उसके राज्य में आकर फैंसी ड्रेस कॉम्पटीशन करेंगे। राजा रेशमलाल इस कॉम्पटीशन की तैयारी के लिए देश भर से दर्जि़यों को बुलाता है लेकिन उसे किसी भी दर्जी का काम पसन्द नहीं आता। तब उनके राज्य में तीन ठग आते हैं जो खुद को मल्टीनेशनल्स फैशन डिज़ाइनर्स बताते हैं और रेशमलाल को एक मल्टीनेशनल जादू का सूट बनाने का आइडिया देते हैं। ये आइडिया रेशमलाल को बहुत पसन्द आता है और उन्हें वो सूट तैयार करने का ऑर्डर दे देता है। जिसके लिए उन तीनों ठगों ने राजा से करोड़ों रुपए ठगे। जादू के सूट को सिर्फ वही देख सकता था जो बुद्धिमान हो क्योंकि ये सूट मूर्खों को नहीं दिखाई देता, इस शर्त के साथ सूट राजा को पहनाया जाता है और राजा के नंगे होने के बावजूद सभी उसके सूट की तारीफ़ ही करते हैं क्योंकि कोई भी चाटुकार मूर्ख नहीं कहलाना चाहता था। लेकिन एक छोटे से बच्चे ने राजा को एहसास करा ही दिया कि वो नंगा है और जब पड़ोसी राजा देशबंधु आता है, उसने भी जादू का सूट पहना है लेकिन अस्ल में वो भी नंगा है और अंत में दोनों राजाओं को उनके उज़्बकपने का अहसास होता है और विदेशी वस्तुओं के बदले स्वदेशी वस्तुओं से प्रेम करने के संदेश के साथ यह नाटक समाप्त होता है।
सिद्धार्थ पाल निर्देशित हास्य-व्यंग्य और कटाक्ष का पुट लिये हुए इस नाटक में राजा देशबन्धु की भूमिका स्वयं निर्देशक ने निभाई, राजा रेशमलाल का किरदार निभाया राहुल चावला ने, अन्य पात्र डाॅ. सुनिता कुमारी थापा, बृजेन्द्र कुमार सिंह, प्रत्यूष वर्सने, शिवम प्रताप सिंह, अनुकूल सिंह, शालिनी मिश्रा, कुमारी वैष्णवी चावला, व स्वाति चावला ने निभाए वहीं मंच परे प्रकाश परिकल्पना व संचालन निखिलेश कुमार मोर्य, घ्वनि संचालन प्रशान्त वर्मा का रहा।
