Explore

Search

Sunday, April 6, 2025, 8:55 am

Sunday, April 6, 2025, 8:55 am

LATEST NEWS
Lifestyle

कविता : ओ बीते हुए कल, याद आता है तू हर पल

Share This Post

कवयित्री : अनुपमा

ओ बीते हुए कल, याद आता है तू हर पल

आज जब खोली वो पुरानी ङायरी,
पढ़ी मेरे लिए लिखी वो तेरी शायरी।

सामने आ गई उस दौर की बातें सारी,
और हो गई गमों से आंखें मेरी भारी।

दिल ले चला फिर से उन गलियों में,
जहां खोया रहता था, तू मुझ में।

तेरी वो बचकानी हरकतें दिखने सी लगी,
भारी आंखें भी अब हंसने लगी।

हंसी के साथ आंसू भी निकल आए,
रंज था, हम क्यों नहीं मिल पाए।

कितनी खुशियां तू मेरे जीवन में लाया था,
बन के मौसम बहार का मुझ पर छाया था।

हर छोटी सी बात का भी ध्यान रखता था,
हर बार मिलने की जगह पहले तू ही पहुंचा करता था।

हर रिश्ते को मेरे बाद रखता था,
प्यार बेशुमार मेरे लिए तेरी आंखों में दिखता था।

फिर एक दिन मेरी जिंदगी को नजर लग गई,
किसी और की नजरें क्या तेरी नजरों से मिल गई।

खुद से खुद को दूर होते रोज देख रही थी,
हर उदासी मेरी ओर बढ़ते देख रही थी।

आ गया वो दिन आखिरी मुलाकात का भी,
पहले आना भूला नहीं था तू उस दिन भी।

वो पहली बार तुझे खामोश देखा था,
और आखिरी बार खुद को तेरी आंखों में देखा था।

तुम तो चले जा रहे थे, मुझ से दूर,
चाह के भी ना रोक पाई, थी इतनी मगरूर।

मानती हूं मेरी बेफिक्री ने सब खत्म किया,
तेरी ओर ध्यान ही मैने कहां दिया?

यह थी मेरी ही लापरवाही,
तभी तो किसी और की परवाह तुझे रास आई।

बरसाया था जो प्रेम तुम ने आज भी ना उस में कोई कमी आई,
इसलिए ही तो तेरे बाद भी कहां किसी में खो पाई।

जिंदा हूं मैं आज भी,अभी,
पर जी रही थी, जब तु मेरे साथ था, कभी।

बस कुछ कहना है-
ओ, मेरे बीते हुए कल,
भूली नहीं तुझे किसी भी पल।

 

Rising Bhaskar
Author: Rising Bhaskar


Share This Post

Leave a Comment