मूर्ति की विशेषता : फाउंटेन से गंगधारा बहेगी, शिव की जटा से निकलकर सातों शिवलिंग का अभिषेक करती हुई महादेव के चरणों प्रवाहित होंगी
पंकज जांगिड़. जोधपुर
कैलाश पर्वत पर अटल तपस्या करने वाले सृष्टि के आदि पुरुष महादेव महाशिवरात्रि से जोधपुर के पीपलेश्वर महादेव मंदिर की पहाड़ी पर तपस्या करेंगे। 26 फरवरी काे महाशिवरात्रि पर कैलाशपति महादेव पीपलेश्वर महादेव मंदिर की मूर्त की प्रतिष्ठा होगी। हालांकि मूर्ति के दर्शन शुरू करने भक्त आ रहे हैं।
सोमवार शाम को मंदिर के प्रमुख पुजारी पंडित शिवसागर शास्त्री द्वारा विधि विधान से पूजा-अर्चना की गई। मंदिर के महंत श्रीधर गिरि महाराज ने जलाभिषेक कर प्रतिमा की जानकारी दी। इस मौके मंदिर समिति सदस्य इंद्रा पुनवानी शास्वत गिरि, पं. सौरभ त्रिपाठी, पं. सूरज शर्मा, पं. श्रवण पंचारिया, पं. कुलदीप मिश्रा, गौसेवक दीपक सोनी, दिलीप सांखला आदि उपस्थित रहे। महाराज ने बताया कि महाशिवरात्रि पर्व के पावन अवसर पर मंदिर समिति के सदस्य शशिकांत तिवाड़ी ने अपने समृति शेष माता-पिता पुखराज देवी-पुरुषोत्तम लाल तिवाड़ी की स्मृति में यह प्रतिमा निर्मित करवाई। आरसीसी सहित मिश्रण द्वारा निर्मित प्रतिमा लगभग एक महीने से तैयार हुई, जिस पर फाउंटेन द्वारा शिव की जटा से गंगधारा बहने जैसा प्रतीत नजर आएगा और नियमित प्रवाहित जल सातों शिवलिंग से बहता हुआ महादेव के चरणों में समर्पित होगा। यह प्रतिमा और शिवलिंग आकर्षण का केंद्र रहेगा और दार्शनिक स्थल प्रतीत होगा।
शशिकांत तिवाड़ी ने बताया की उनकी माताजी पुखराज देवी ने पुलिस विभाग में सेवारत रहते हुए तथा सेवानिवृत्ति के बाद भी समाजसेविका के साथ मंदिर की व्यवस्थापिका रहते हुए धार्मिक आयोजनों में बढ़चढकर सहभागिता निभाई। मंदिर में प्रत्येक सोमवार को अपराह्न 3 से शाम 6 बजे तक हरिकीर्त्तन का आयोजन होता है, जिसके चलते आज फाल्गुन मास के उपलक्ष्य में भजन गायकों ने मनमोहन होरिया व भजनों की प्रस्तुतियां दी।
