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गीता के 701वें श्लोक की खोज, 5168 साल पहले पास्ट में जाकर डीके पुरोहित ने की खोज

-डीके पुरोहित दो साल बाद 27 दिसंबर 2023 को ही जोधपुर लौटा, पास्ट में पुरोहित ने गीता के 701वें श्लोक की खोज की

डीके पुरोहित. जोधपुर

डीके पुरोहित ने गीता के 701वें श्लोक की खोज 5168 साल पहले पास्ट में जाकर की है। पुरोहित 27 दिसंबर 2023 को ही जोधपुर लौटा है। दो साल बाद जब व पास्ट से लौटा तो सबकुछ भूल चुका था। जो आधा-अधूरा याद है उसे यहां वर्णित किया जा रहा है। वैसे तो गीता में कुल 18 अध्याय हैं और 700 श्लोक हैं। अंतिम श्लोक है- यदा यदा हि धर्मस्य ग्लानिभज़्वति भारत:। अभ्युत्थानमधमज़्स्य तदात्मानं सृजाम्यहम्॥

इस श्लोक का अर्थ है- हे भारत (अर्जुन), जब-जब धर्म ग्लानि यानी उसका लोप होता है और अधर्म में वृद्धि होती है, तब-तब मैं (श्रीकृष्ण) धर्म के अभ्युत्थान के लिए स्वयम् की रचना करता हूं अर्थात अवतार लेता हूं।

इसी श्लोक के बाद अर्जुन भगवान श्रीकृष्ण से कहता है कि उसकी सभी समस्याओं का निवारण हो गया है। सब दूध का दूध और पानी का पानी हो गया है। मेरा रथ युद्ध भूमि के बीच में ले चलो। मेरा गांडिव युद्ध के लिए मचल रहा है।

अंतिम श्लोक इस प्रकार है

केशव मम सर्वाणि समस्यानि गतानि। सर्वं क्षीरदुग्धं जलजलं परिणतम् अस्ति।। रथं मम रणमध्यं नय। मम गाण्डीवा युद्धं प्रेरयति।।

Dilip Purohit
Author: Dilip Purohit

Group Editor