आहार-विचार गोष्ठी में मुख्य वक्ता के रूप में समाजसेवी व चिंतक सुरेश राठी ने स्वास्थ्य ही सबसे बड़ा धन विषय पर सार्थक विचार व्यक्त किए।
कार्यक्रम में डॉ. मुस्कान सक्सेना की लिखित पुस्तक ‘प्रकृति ही चिकित्सक’ का विमोचन भी किया गया।
दिलीप कुमार पुरोहित. राखी पुरोहित. जोधपुर
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आज का दिन स्वास्थ्य साधना केंद्र और डॉ. मुस्कान सक्सेना के लिए ऐतिहासिक है। क्योंकि डॉ. मुस्कान सक्सेना की किताब ‘प्रकृति ही चिकित्सक’ का विमोचन है। कोई भी किताब उसके लेखक को सैकड़ों वर्ष तक जिंदा रखती है। लेखक नहीं रहता पर उसका नाम जिंदा रहता है। हम कोशिश करेंगे कि कोई भी अपडेट आएंगे उसे इस बुक में शामिल करेंगे। यह विचार समाजसेवी सुरेश राठी ने रविवार को स्वास्थ्य साधना केंद्र में आहार-विचार गोष्ठी में बतौर मुख्य वक्ता व्यक्त किए।
उन्होंने ‘स्वास्थ्य ही सबसे बड़ा धन’ विषय पर बोलते हुए कहा कि जब मैं छोटा था तो मेरे पास कुछ नहीं था, पर सबकुछ था। आज मेरे पास सबकुछ है पर कुछ नहीं है। उसका कारण है स्वास्थ्य। जब मैं छोटा था तो स्वास्थ्य था। मुस्कान थी। मस्ती थी। मुझे याद है जब बच्चा पैदा होता है तो दिन में सौ बार हंसता है। और आज आदमी हंसना भूल गया है। मुस्कराना भूल गया है। मस्ती भूल गया है। यह ह्यूमन नेचर है। आज आदमी के पास सबके लिए टाइम है पर खुद के लिए टाइम नहीं है। स्वास्थ्य के लिए टाइम नहीं है। एलोपैथी और डॉक्टरों के चक्कर में ऐसे चक्रव्यूह में हम लोग फंस गए हैं कि उससे निकल नहीं पा रहे। मुझे याद है कि कई वर्षों से पहले नाड़ी वैद्य के पास जाते थे और वह नाड़ी देखकर दवा देता था। आज हम डॉक्टर के पास जाते हैं तो उसके यहां लाइन लगी होती हैं। हमारा नंबर आता है तो वह परेशानी पूछता है। हम परेशानी बताते हैं और उधर दवाई एड होती जाती है। दरअसल एलोपैथी दवा इमरजेंसी के लिए ठीक है। ठीक वैसे ही जैसे किसी की डेथ हो जाती है तो जल्दी पहुंचने के लिए हम एयर टिकट करवा लेते हैं। लोग हॉस्पिटल अधिक जाते हैं, मंदिर कम जाते हैं। जबकि आपका इलाज मंदिर में है। हॉस्पिटल तो इमरजेंसी के लिए बहुत बढ़िया है। केवल एक चीज कह रहा हूं- ऐलोपेथी में जिनके पास पैसा है उनके लिए ठीक है। आम आदमी के लिए बहुत बड़ी प्रॉब्लम है। पिछले 30 सालों में मैने 30 हजार घंटे सुने हैं। रोजाना तीन घंटे सुनता हूं। 300 यू-ट्यूब चैनल मैं सुनता हूं। जिसमें से 30 सलेक्ट किए हैं, जिससे मैंने क्या सीखा।
पृथ्वी, जल, सूर्य, आकाश, वायु तत्व में इलाज संभव
सुरेश राठी ने कहा कि पृथ्वी, जल, सूर्य, आकाश, वायु तत्व में इलाज संभव है। जमीन पर टहलना बहुत जरूरी है। मैं एक घंटे गार्डन में घूमता हूं, उससे सूर्य स्नान, वायु स्नान, पृथ्वी तत्व भी आ जाता है। मुझे याद है कि मैं बचपन में खांडा फलसा में जालप मोहल्ला में तापी बावड़ी में तीन-तीन घंटे स्विमिंग करता था। माताजी डांट कर ले जाती थी कि तीन घंटे हो गए घर चल। आज हम सूर्य तत्व से दूर हो गए हैं। कितने लोग है जो सनबाथ लेते हैं। बीमारियां इसलिए आती हैं क्योंकि हम प्रकृति से दूर हो गए हैं। सभी बीमारियों का एक ही इलाज है प्रकृति। मेरे लेक्चर के तीन पार्ट है- पहला-पंच तत्व, दूसरा प्रैक्टिकल प्रॉब्लम है आज की तारीख में तो वह है परिवार, परोपकार, परमात्मा, परिश्रम और प्रेम। और तीसरा है किचन। अगर हम नमक, मैदा, तेल, घी, शक्कर कम नहीं करेंगे हम बीमारी से बच नहीं पाएंगे।
डॉ. अजय उमराव ने किडनी की देखभाल के तरीके बताए
कार्यक्रम में स्वास्थ्य साधना केंद्र के प्रमुख चिकित्सा अधिकारी डॉ. अजय उमराव ने किडनी की देखभाल के तरीके बताए। उन्होंने किडनी की स्थिति, उसके काम और किडनी की विशेषताओं का वर्णन करते हुए नैचुरोपैथी पद्धति से किडनी को सुरक्षित रखने के तरीके बताए।
डॉ. मुस्कान सक्सेना ने पुस्तक का परिचय दिया
इस मौके पर डॉ. मुस्कान सक्सेना ने पुस्तक ‘प्रकृति ही चिकित्सक’ का परिचय दिया। उन्होंने कहा कि पुस्तक दो भागों में है। पहले भाग में रोग एवं उपचार योजनाएं और दूसरे भाग में उपचार पद्धतियां दी गई हैं। डॉ. मुस्कान सक्सेना ने स्वस्थ रहने के बैसिक टिप्स भी दिए। उन्होंने कहा कि 10 हजार स्टेप रोज चलना जरूरी है। बॉडी को मूव करना जरूरी है। सूर्य नमस्कार कर सकें तो स्वास्थ्य के लिए बेहतर रहेगा। लंघ्स को स्वस्थ रखने के लिए अनुलोम-विलोम करें। उन्होंने नैचुरोपैथी की विशेषता बताते हुए प्रकृति के साथ चलने पर जोर दिया। डॉ. मुस्कान सक्सेना ने विशेष रूप से दीपा अरोड़ा का आभार जताया जिन्होंने इस पुस्तक के संपादन में विशेष योगदान दिया और चार बार बुक को अपडेट किया।
स्वास्थ्य साधना केंद्र 60 साल पुरानी संस्था : वंदना मोदी
न्यासी वंदना मोदी ने कहा कि स्वास्थ्य साधना केंद्र 60 साल पुरानी संस्था है। यहां नैचुरोपैथी डॉक्टरों की टीम हैं। रहने-खाने की उत्तम व्यवस्था है। बड़ा एसी हॉल है। उन्नत किचन है, जहां योग्य चिकित्सकों की देखरेख में भोजन तैयार होता है। जूस सेंटर है- जहां ताजा जूस मिलता है। अंकुरित मूंग और ताजे फल मिलते हैं। वंदना मोदी ने कहा कि शरीर एक साइकिल है। इसको समय-समय पर मेंटनेंस की जरूरत रहती है। प्रकृति के अनुरूप जीवन पद्धति अपनाकर हम शरीर को स्वस्थ रख सकते हैं। उन्होंने कहा कि जानकारी के अभाव में हम स्वास्थ्य को स्वस्थ नहीं रख पाते। उन्होंने कहा कि स्वास्थ्य साधना केंद्र में आप उचित मूल्य पर प्रकृति के अनुरूप अपना इलाज करवा सकते हैं। हर किसी को इसका फायदा उठाना चाहिए।
कुछ लोग जीवन में नमक की तरह, उनकी कभी अनदेखी ना करें : योगेश माहेश्वरी
कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए प्रबंध न्यास योगेश माहेश्वरी ने कहा कि कुछ लोग जीवन में सब्जी में नमक की तरह होते हैं। वे दिखाई नहीं देते लेकिन उनका महत्व कम नहीं है। उनकी कभी भी अनदेखी नहीं करनी चाहिए। ऐसे लोग जब नहीं रहते तब हमें पता चलता है कि वे हमारे लिए कितने महत्वपूर्ण थे। इसलिए समय रहते ऐसे लोगों की कद्र कर लेनी चाहिए। उन्होंने कहा कि गेहूं का उपयोग कम करें। बाजरा, ज्वार आदि भोजन में अधिक लें। उन्होंने कहा कि स्वास्थ्य साधना केंद्र में अगर कोई व्यक्ति आहार-विचार संबंधी गोष्ठी आयोजित करना चाहें तो जन्म दिन और अन्य अवसरों पर 25 हजार रुपए की सहयोग राशि जमा करवाकर कर सकते हैं। वे 150 लोगों को आमंत्रण दे सकते हैं। उन्होंने कहा कि जिस तरह तैरना सीखना है तो पानी में उतरना पड़ेगा, वैसे ही स्वस्थ रहना है तो प्राकृति स्वास्थ्य केंद्र में आना पड़ेगा। यहां आएंगे तो कुछ न कुछ फायदा मिलेगा। स्वास्थ्य साधना केंद्र को एनईबीएच एक्रिडिएशन मिल चुका है। योगेश माहेश्वरी ने बताया कि अन्य एक्रिडिएशन के लिए प्रक्रिया चल रही है ताकि सरकारी कर्मचारियों को प्राकृतिक पद्धति से इलाज में मदद मिल सकें। योगेश माहेश्वरी ने कहा कि स्वास्थ्य साधना केंद्र को एक एंबुलेंस की दरकार है। इस पर सुरेश राठी ने एंबुलेंस के लिए राशि देने की घोषणा की।
पुस्तक का विमोचन :
कार्यक्रम के दौरान पुस्तक का विमोचन किया गया। विमोचन समारोह में सुरेश राठी, श्रीमती शशि राठी, सौरभ राठी, श्रीमती फूलकौर मूंदड़ा, मदनलाल मूंदड़ा, योगेश माहेश्वरी, डॉ. मुस्कान सक्सेना, डॉ. अजय उमराव, वंदना मोदी सहित अन्य लोग मौजूद थे।
सुख के सब साथी, दुख में ना कोई…
कार्यक्रम के आरंभ में शंकरलाल ने एक प्रेरक गीत प्रस्तुत किया- सुख के सब साथी, दुख में ना कोई…। इस मौके पर दामोदर दास ने सुरेश राठी का स्वागत किया। नखताराम, अरुणा मेहता और मंजुला अरोड़ा ने स्वास्थ्य साधना केंद्र में इलाज से उन्हें जो फायदा मिला उसके अनुभव बताए।
कार्यक्रम में सुरेश राठी ग्रुप की टीम का समर्पण देखने को मिला
कार्यक्रम में सुरेश राठी की सेक्रेटरी दीपा अरोड़ा की अहम भूमिका रही। उन्होंने कहा कि सुरेश राठी ग्रुप में हम सब उनके परिवार का हिस्सा हैं। दीपक सारड़ा, सागर दायमा, दिलीप बहादुर सहित काफी सारा स्टाफ भी मौजूद था। कार्यक्रम के अंत में स्वास्थ्य साधना केंद्र की तरफ से सुरेश राठी और श्रीमती शशि राठी को पौधा भेंट कर उनका आभार जताया गया।













