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Sunday, August 23, 2026, 8:40 am

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Lifestyle

नाचीज बीकानेरी की आज के हालात पर ताजा गजल

रोटी के लिए तो जाना पड़ता था कमाने को

याद करते हैं सभी अपने-अपने जमाने को ।
रोटी के लिए तो जाना पड़ता था कमाने को।।

आज की चकाचौंध में सब चक्रघिनी हो रहे ।
सभी लगे हैं अपनी अपनी दाढ़ी बुझाने को।।

अपने किरदार को कोई बचा पाए बड़ी बात है।
हरेक ढूंढता है तुरत-फुरत कमाई के ठिकाने को।।

तनाव ग्रस्त जिंदगी जीने को सभी अभ्यस्त से हैं।
सभी मजबूर हैं अपने अपने दुख को छुपाने को ।।

“नाचीज़”अमीर गरीब सभी अपने चक्रव्यू में फंसे।
बहुत जल्दी में इस जिंदगी की गिजाएं खाने को ।।

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Dilip Purohit
Author: Dilip Purohit

Group Editor