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Sunday, August 23, 2026, 8:43 am

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एडवोकेट अनिल भारद्वाज का बारिश पर आधारित एक गीत

संक्षिप्त परिचय :

अनिल भारद्वाज,एडवोकेट :
शिक्षा- बी.एससी. एम.ए. ,एल-एल.बी , बी .म्यूजिक. (वायलिन)।
संप्रति- म. प्र .उच्च न्यायालय खंडपीठ ग्वालियर में वरिष्ठ अभिभाषक।
साहित्य विधा- गीत ,गजल, कविताएं तथा कहानी।
साहित्य लेखन- सन् 1970 से निरंतर लेखन जारी।
प्रकाशित कृतियां- बीत गया मधुमास, (गीत संग्रह), (कमला अवधेश बाजपेई पुरस्कार 1996, से पुरस्कृत कृति), हिंदी के आंसू, (हिंदी पर विश्व का प्रथम महाकाव्य), हिंदी चालीसा।
अप्रकाशित कृतियां- हिंदी हिंदुस्तान की,(खंडकाव्य), आज का महाभारत,( व्यंग खंडकाव्य), बांसुरी (खंडकाव्य), गजलों के मौसम, (गजल संग्रह), आदि।
संगीत एवं कला क्षेत्र- गायन तथा वादन – बांसुरी , वायलिन,माउथ आर्गन एवं अन्य वाद्य यंत्रों के वादक कलाकार तथा चित्रकार।
राष्ट्रीय एवं अंतर्राष्ट्रीय सम्मान,अभिनंदन एवं उपाधि।
विशिष्ट उपलब्धियां- वरिष्ठ हिंदी सेवी साहित्यकार, विश्व के प्रथम हिंदी माता मंदिर की, ग्वालियर, मध्य प्रदेश में स्थापना सन् 1995 में कराई गई।
प्रकाशन एवं प्रसारण- विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं में रचनाओं व आलेखों का प्रकाशन।
दूरदर्शन केंद्रों व अन्य टीवी चैनलों एवं आकाशवाणी केंद्रों से समय-समय पर रचनाओं एवं बांसुरी की प्रस्तुति।
संपर्क सूत्र- मोबाइल नंबर- 9827304030

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बूंदों की झालर

प्यार भरी बातें करती हैं,
सावन की रिमझिम।

काली बदली छाई, मस्तानी रुत आई,
पुरवा की डोली में, बरखा रानी आई।
बादल की दुल्हन लगती है,
सावन की रिमझिम।

भीगा भीगा मौसम, भीगा तन मन यौवन,
भीगी भीगी सी हैं, भीगे दिल की धड़कन।
ख्वाबों को गीले करती है,
सावन की रिमझिम।

रात मिलन की आई, मस्त फुहारें लाई,
सोलहवें सावन ने, तन में ली अंगड़ाई।
रह रह कर छेड़ा करती हैं,
सावन की रिमझिम।

सूरज, चांद, सितारे, बौछारों के मारे,
मेघों की नगरी में, छिप जाते हैं सारे।

बूंदों की झालर लगती है,
सावन की रिमझिम।

गीत बहारों के गाती हैं
सावन की रिमझिम।

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Dilip Purohit
Author: Dilip Purohit

Group Editor