शिव वर्मा. जोधपुर
श्री साधु मार्गी जैन परम्परा के राष्ट्रीय संत आचार्य रामेश की आज्ञानुवर्तीनी सुशिष्या पर्याय ज्येष्ठा साध्वी प्रभातश्री ने पावटा बी रोड स्थित चौरडिया भवन में आज से प्रारम्भ होने जा रहे चातुर्मास के प्रथम पावन दिवस के अवसर पर फरमाया कि चातुर्मास यह सन्देश लेकर आया है कि हम धर्म, ध्यान, त्याग, तपस्या में जुटकर अपने धर्म मार्ग को मजबूती प्रदान करें। धर्म के माध्यम से हम अपने कर्मों की निर्जरा करें। सत्संग में आया व्यक्ति साधु सन्तों की वाणी का श्रवण कर भव सागर से तिर जाता है। इस चातुर्मास काल में हमें ज्यादा से ज्यादा सन्त समागम कर अपने ज्ञान,ध्यान में वृद्धि करते हुए तप,त्याग, धर्म आराधना में लीन होना है ।
वहीं कमला नेहरू नगर प्रथम विस्तार, आचार्य श्री नानेश मार्ग स्थित समता भवन में विराजित श्री साधु मार्गी जैन परम्परा के राष्ट्रीय संत आचार्य रामेश की आज्ञानुवर्तीनी सुशिष्या पर्याय ज्येष्ठा साध्वी चन्द्रकला ने आज से प्रारम्भ होने जा रहे चातुर्मास के प्रथम पावन दिवस के अवसर पर फरमाया कि धर्म की आराधना करने वाले बहुत है, लेकिन धर्म को समझा नहीं जा रहा है।धर्म आराधना से पहले हमें अपने समय समय पर विचलित होने वाले मन को शान्त करना होगा, मन की दृढ़ता, एकाग्रता ही हमें धर्म की राह पर ले जा सकती है। मन की चंचलता से हम कुछ भी हासिल नही कर पायेंगे। समता महिला मंडल की पदाधिकारी ललिता कोटडिया ने चातुर्मास कार्यक्रम के बारे में जानकारी प्रदान की धर्म आराधना एवं त्याग, तपस्या के रूप में आज से चोरडीया भवन और समता भवन दोनों ही स्थलों पर एकासन ,आयम्बिल,उपवास, तेला आदि की लड़ी,सामायिक, प्रतिकमण,संवर, दया भाव आदि भी प्रतिदिन नियमित रूप से प्रारम्भ हो गये हैं । इसी कड़ी में शगुन मोहनौत ने तेला एवं सौरभ लूँकड़ ने बेला उपवास के प्रत्याख्यान साध्वी प्रभातश्री के मुखारबिन्दु से ग्रहण किये। समता महिला मंडल की ममता पामेचा,चंद्रा बैद एवं ललिता कोटडिया ने भजन प्रस्तुत किया। संचालन अनिल सांखला द्वारा किया गया। कल से प्रवचन का समय दोनों स्थलों पर प्रात: 8.45 बजे का रहेगा।
