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Thursday, April 30, 2026, 12:38 pm

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नवरात्रि पर नीलम व्यास स्वयंसिद्धा की रचनाएं

नीलम व्यास स्वयंसिद्धा

नारी बनो सूरज तुम

चलो नारी उठो जागो नया सूरज उगाना है।
करो हिम्मत बढ़ो आगे जमाने को दिखाना है।
पढ़ो अफसर बनो नारी करो तुम राज अब जग पे।
करो नव ज्ञान तुम हासिल नई राहें बनाना है।।

मिले मंजिल उसी को हैं लहू देकर जवानी ली।
बनों फ़ौजी पुकारे देश सीमा ने सलामी दी।
चलो बलि दे करो तुम नाम नर सम बन तजो भय तुम।
सजे घर द्वार हर परिवार ममता हिय रवानी ली।।

बसंती ओढ़ चुनरी को करो बलि देश पर खुद को।
बनाओ देश को ही घर बनाओ नेक हर मन को।
मिटा दो भेद जग से तुम सदा सम भाव विकसाना।
करो लेखन अमर ऐसा लगो सूरज सभी जन को।।

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सभी के मन राम बसे

सभी के मन बसे राघव, सिखाते प्रेम की भाषा।
हरो तम को उजाला हो, करो सत कर्म भर आशा।।
गरीबों का भला करना,दुआ इनकी फला जाती।
मिटा दो दीनता जग से, बहारें प्रेम की आती।।

घिरे हैं जो अँधेरों से, नया दीपक जलाओ तुम।
जगाओ राम को अपने, नया सूरज उगाओ तुम ।।
बुराई को मिटा लेना, चलो सत राह पे सारे।
करो एका सभी मिल के, खुशी आती दिखे द्वारे।।

लिखो प्रेरक नया दिल से, युवा शक्ति पढ़े रचना।
रचो तुम छंद अब प्यारा, दिखावे से सदा बचना।।
सुनाओ गीत छू ले मन, बने नारा युवाओं का ।
नई पीढ़ी बने दानी, भरे दामन वफ़ाओं का।।

पढ़े सारे बढ़े आगे, बने अब विश्व गुरु भारत।
पढ़े सब वेद गीता भी,पुराणों की करें आरत ।
जमाने को दिखाना है, बने भारत विश्व नेता।
नया युग आ गया अब से, बधाई विश्व भी देता।।

पधारे राम जी अब तो, नया युग राम जी लाये।
मिटेंगे दुःख दीनों के, सभी मिल के ही गायें।
डरो मत राम कहते हैं, बनो योद्धा सदा जीतो।
मिटाओ भेद को जग से, जिया हर लो सुना गीतों।।

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Dilip Purohit
Author: Dilip Purohit

Group Editor