तो आइए इस दीपावली हम संकल्प लेते हैं कि तेज और धमाके वाले पटाखों से परहेज करेंगे, पटाखे छोड़ेंगे मगर धमाके वाले नहीं ताकि धमाकों की आवाज में जानवरों और पक्षियों की आवाज खामोश नहीं हो जाए
डीके पुरोहित. जोधपुर
दीपावली पर तेज आवाज और धमाके वाले पटाखों को फाेड़ने से हमें बचना होगा। ऐसे पटाखे हमारे पर्यावरण के लिए तो खतरा हो ही सकते हैं, साथ ही हमारे आसपास रहने वाले जानवरों और पक्षियों के जीवन के लिए खतरा बन सकते हैं। जानवरों और पक्षियों का जीवन हमारे लिए महत्वपूर्ण है। जानवर और पक्षी काफी संवेदनशील होते हैं।
पटाखों की तेज आवाज़ से जानवरों में हृदय गति बढ़ जाती है और वे डर जाते हैं। पटाखों की आवाज़ से पक्षियों के कान के पर्दे फट सकते हैं। पटाखों की आवाज़ से पक्षियों में दिल का रोग होने की संभावना बढ़ जाती है। पटाखों से निकलने वाले धुएं से पक्षियों का श्वसन तंत्र प्रभावित हो जाता है। पटाखों से निकलने वाले धुएं से पक्षियों की मौत भी हो सकती है। पटाखों से निकलने वाले धुएं से गर्भधारण करने वाले पशुओं का गर्भपात भी हो सकता है। दुधारू पशु भी आवाज़ के चलते तनावग्रस्त हो जाते हैं, जिससे उनकी दूध देने की क्षमता कम हो जाती है। रात में पेड़ पर निवास करने वाले पक्षी भी आवाज़ सुनकर घोंसले से बाहर आ जाते हैं और अन्य दूसरे जानवरों के शिकार हो जाते हैं।
बिल्लियों के लिए पटाखे बने खतरे की घंटी
बिल्ली संवेदनशील प्राणी होती है। वैसे भी बिल्लियों की संख्या कम होती जा रही है। घरों में विचरण करने वाली बिल्लियां इन दिनों दीपावली पर विशेष रूप से परेशान होती है। जब तेज धमाकों के साथ पटाखे फूटते हैं तो बिल्लियों के लिए खतरा बढ़ जाता है। इसलिए हमें इस बात का ध्यान रखना चाहिए कि तेज ध्वनि वाले पटाखों को फोड़ने से बचना होगा। ऐसा करके हम बिल्लियों के जीवन पर मंडरा रहे खतरे को कम कर सकते हैं।
पक्षियों को बचाने के लिए ध्वनि वाले पटाखों से बचना जरूरी
पक्षियों के लिए दीपावली पर विशेष ध्यान रखने की जरूरत है। बढ़ती आधुनिकता के साथ पक्षी वैसे भी घटते जा रहे हैं वहीं दूसरी ओर दीपावली पर तेज ध्वनि और धमाके वाले पटाखों से बचने की जरूरत है ताकि पटाखों से पक्षियों के जीवन को नुकसान ना हो। पक्षी काफी संवेदनशील होते हैं और तेज धमाके से उनकी नन्हीं जान को खतरा हो सकता है।
पटाखों से निकलने वाले धुएं और आवाज़ से मनुष्यों को भी नुकसान होता है
पटाखों से निकलने वाला धुआं दिल के मरीज़ों के लिए खतरनाक होता है। बुजुर्गों के लिए तो तेज आवाज वाले पटाखे खासे घातक होते हैं। देर रात तक बजने वाले वाले पटाखों से बुजुर्गों की नींद में तो खलल पड़ता ही है साथ ही उनके लिए तेज आवाज वाले पटाखे सुकून छीन लेने वाले सिद्ध होते हैं। दिल के मरीजों के लिए ऐसे पटाखे खतरे की घंटी होते हैं। तेज धमाके के साथ पटाखे फूटने पर दिल के साथ दिल्लगी हो सकती है। पटाखों की तेज आवाज़ से दिल पर असर पड़ता है। इसलिए हम तेज आवाज वाले पटाखों को फोड़ने से बचने की कोशिश करनी चाहिए।
