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Tuesday, August 25, 2026, 5:02 pm

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Lifestyle

डेजर्ट फेस्टिवल का पोकरण से आगाज तो अच्छा पर अभी भी सुधार की जरूरत…

जैसलमेर से सीएस भाटिया की रिपोर्ट

पोकरण से डेजर्ट फेस्टिवल का आगाज तो अच्छा हुआ पर अभी भी सुधार की जरूरत है। इसे अधिकारियों का मेला बनाने की बजाय जनता की भागीदारी से जोड़ना जरूरी है। खासकर पोकरण में विदेशी सैलानियों को अधिक से अधिक जुटाकर ही मेला सफल बनाया जा सकता है। इस रिपोर्टर ने पोकरण के बाशिदों से बात की तो यही बात उभरकर सामने आई कि पोकरण को डेजर्ट फेस्टिवल का हिस्सा बनाना वाकई अच्छा निर्णय है मगर इसमें पोकरण की जनभागीदारी भी जरूरी है। खासकर कार्यक्रमों में पारदिर्शता और स्वच्छ निर्णय भी जरूरी है।

अभिलाषा चौधरी बनी मिस पोकरण 

डेजर्ट फेस्टिवल में अभिलाषा चौधरी मिस पोकरण बनी है। मिस पोकरण प्रतिष्ठा भरी प्रतियोगिता होती है। इसकी तेयारी में प्रतिभागी लंबे समय से तैयारी करते हैं। पोकरण के डेजर्ट फेस्टिवल में इस बार अभिलाषा चौधरी के सिर पर मिस पोकरण का ताज रहा।

गोपाल सिंह शैतानसिंह नगर बने मिस्टर पोकरण

फेस्टिवल में मिस्टर पोकरण का खिताब गोपालसिंह शैतान नगर ने जीता। मिस्टर पोकरण की इस प्रतिष्ठित प्रतियोगिता में बांके जवानों ने खूब आजमाइस की। हर कोई अपने ढंग से तैयार हुआ मगर अंतत: जीत का सेहरा गोपालसिंह के सिर पर बंधा।

इन कमियों पर गौर करे प्रशासन…

मरू महोत्सव का आगाज अधूरी तैयारियों और प्रचार-प्रसार की कमी के चलते फीका रहा। कार्यक्रम स्थल से पोकरण विधायक महंत प्रतापपुरी महाराज और पालिका अध्यक्ष मनीष पुरोहित कार्यक्रम के बीच में ही चलते बने, जबकि पंचायत समिति सांकड़ा के प्रधान भगवतसिंह कार्यक्रम में पहुंचे ही नहीं। मरू महोत्सव को लेकर प्रशासन की उदासीना साफ नजर आई। जनप्रतिनिधियों की उदासीनता के कारण न तो पालिका पार्षदगण मौजूद रहे और न ही देशी-विदेशी पर्यटकों की भीड़ जुटी। स्थानीय लोग भी पूरी तरह जुट नहीं पाए। मिस पोकरण प्रतियोगिता में 5 बालिकाओं ने ही भाग लिया। वहीं मिस्टर पोकरण में 8 प्रतिभागी ने भाग लिया ।मिस पोकरण को लेकर एक बार फिर विवादों के घेरो में दिखा। साफा बांधो में भैरूलाल ने प्रथम स्थान प्राप्त किया । रस्साकशी प्रतियोगिता में महादेव टीम ने प्रथम स्थान प्राप्त किया।

BSF जवानों और स्कूली बच्चों ने रखी लाज

कार्यक्रम में BSF के अधिकारियों व जवानों के साथ स्कूली बच्चों ने भाग लेकर मरू महोत्सव की गरिमा को बचाने का प्रयास किया। वहीं, पंचायत समिति सांकड़ा के प्रधान भगवतसिंह का नहीं समारोह में नही पहुंचना भी चर्चा का विषय बना । जनप्रतिनिधियों के इस रवैये से जनता में रोष देखा जा रहा है। मरू महोत्सव जैसे भव्य आयोजन में प्रशासन की लचर व्यवस्था और जनप्रतिनिधियों की बेरुखी पर शहरवासियों में गहरी नाराजगी है। लोग सवाल उठा रहे हैं कि जब जनप्रतिनिधि ही अपनी जिम्मेदारी से मुंह मोड़ लेंगे, तो ऐसे आयोजनों का भविष्य क्या होगा?

Dilip Purohit
Author: Dilip Purohit

Group Editor