आयुर्वेद विवि में शोध कार्य के लिए पार्थिव देह का किया गया दान
कुलपति प्रोफेसर प्रजापति ने परिवार के निस्वार्थ योगदान के लिए सराहना की
शिव वर्मा. जोधपुर
डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन राजस्थान आयुर्वेद विश्वविद्यालय जोधपुर के संघटक आयुष महाविद्यालय में चिकित्सा अध्ययन और शोध कार्य के लिए पार्थिव देह का दान किया गया। यह पुण्य कार्य स्वर्गीय रामेश्वर सिंह गहलोत पुत्र स्वर्गीय मुनीलाल गहलोत (भादरी मंदिर, मंडोर, जोधपुर निवासी) के परिवार द्वारा किया गया।
रामेश्वर सिंह गहलोत का निधन 9 फरवरी 2025 को हुआ। वे अपने पीछे एक भरा-पूरा परिवार छोड़ गए हैं, जिसमें उनके पुत्र—नरपत सिंह,युधिष्टर गहलोत, दो पुत्रिया रेखा एवं अनीता तथा अन्य परिजन शामिल हैं। कुलपति प्रोफेसर प्रजापति ने योगदान की सराहना की। कुलपति प्रोफेसर (वैद्य) प्रदीप कुमार प्रजापति ने देहदान को चिकित्सा शिक्षा और शोध के लिए एक अमूल्य योगदान बताते हुए कहा कि यह पार्थिव देह हमारे चिकित्सा अध्ययन और शोध में सफलता का आधार बनेगी। उन्होंने इसे “प्रथम गुरु” कहते हुए परिजनों के निस्वार्थ भाव की सराहना की।
पोस्ट ग्रेजुएट इंस्टीट्यूट ऑफ आयुर्वेद के परिसर में पार्थिव देह पर पुष्पांजलि अर्पित की गई और छात्रों को ‘केडेवरिक ओथ’ दिलाई गई। साथ ही, परिवार की स्मृति में ऑवले का पौधा लगाया गया। प्राचार्य एवं रचना शरीर विभाग के विभागाध्यक्ष ने देहदान को समाज के लिए प्रेरणादायक बताया और अन्य लोगों से भी इस पुनीत कार्य के लिए प्रेरणा लेने का आग्रह किया। स्वर्गीय रामेश्वर सिंह गहलोत के पुत्र नरपत सिंह, युधिष्टर गहलोत एवं दो पुत्रिया रेखा तथा अनीता ने सक्रिय भूमिका निभाई । शरीर रचना विभाग ने इस पुण्य कार्य के लिए परिवार का आभार व्यक्त किया। इस अवसर पर डॉ राकेश कुमार शर्मा, डॉ नवनीत दाधीच, डॉ.अमित गहलोत एवं स्नातकोत्तर छात्र उपस्थित रहे ।
