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Sunday, August 23, 2026, 12:58 pm

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Lifestyle

मायड़ भाषा दिवस पर नाचीज बीकानेरी का गीत

एक हबीड़ों जोरां सूं मारो रे…

मीठी बोली रा मतवाळा अब तो जागो रे।
भाषा री मान्यता सारू बिगुल बजाओ रे।।
एक हबीड़ों जोरां सूं मारो रे……

बहरी-गूंगी सरकार नैं,सगळा मिल हिलाओ रे।
पन्द्रह करोड़ लोगां री भाषा नै मान्यता दिलाओ रे।।
एक हबीड़ों जोरां सूं मारो रे…….

खाली बातां अर दिलासां सूं , पेट नीं भरणों रे।
कोच्छा टांगलो सगळा भायां,अबै दिल्ली घेरो घालो रे।।
एक हबीडो जोरां सूं मारो रे…..

सांसद-विधायकां सूं कीं नीं होणो-जाणो रे ।
कवि-लेखकां अर लिखारां एक हबीडो मारो रे।।
एक हबीडो जोरां सूं मारो रे …..

पंच-सरपंच सगळा भेळा होय अलख जगाओ रे।
ठेठ गांव-ढाणी सूं भाषा री अलख जगाओ रे।।
एक हबीडो जोरां सूं मारो रे…….

स्कूल-कालेजां में मान्यता सारू धुणी धुखाओ रे।
मोटयारां नैं भेळा कर संसद रो घेरो घालण चालो रे।।
एक हबीडो जोरां सूं मारो रे ……

मायड़ भाषा सारू तन-मन-धन सूं सगळा लागो रे।
“नाचीज”रो कैवणो आरपार री लड़ाई मांडो रे।।
एक हबीडो जोरां सूं मारो रे …..

मईऩुदीन कोहरी ” नाचीज़ बीकानेरी”
मो 9680868028

Dilip Purohit
Author: Dilip Purohit

Group Editor