एक हबीड़ों जोरां सूं मारो रे…
मीठी बोली रा मतवाळा अब तो जागो रे।
भाषा री मान्यता सारू बिगुल बजाओ रे।।
एक हबीड़ों जोरां सूं मारो रे……
बहरी-गूंगी सरकार नैं,सगळा मिल हिलाओ रे।
पन्द्रह करोड़ लोगां री भाषा नै मान्यता दिलाओ रे।।
एक हबीड़ों जोरां सूं मारो रे…….
खाली बातां अर दिलासां सूं , पेट नीं भरणों रे।
कोच्छा टांगलो सगळा भायां,अबै दिल्ली घेरो घालो रे।।
एक हबीडो जोरां सूं मारो रे…..
सांसद-विधायकां सूं कीं नीं होणो-जाणो रे ।
कवि-लेखकां अर लिखारां एक हबीडो मारो रे।।
एक हबीडो जोरां सूं मारो रे …..
पंच-सरपंच सगळा भेळा होय अलख जगाओ रे।
ठेठ गांव-ढाणी सूं भाषा री अलख जगाओ रे।।
एक हबीडो जोरां सूं मारो रे…….
स्कूल-कालेजां में मान्यता सारू धुणी धुखाओ रे।
मोटयारां नैं भेळा कर संसद रो घेरो घालण चालो रे।।
एक हबीडो जोरां सूं मारो रे ……
मायड़ भाषा सारू तन-मन-धन सूं सगळा लागो रे।
“नाचीज”रो कैवणो आरपार री लड़ाई मांडो रे।।
एक हबीडो जोरां सूं मारो रे …..
मईऩुदीन कोहरी ” नाचीज़ बीकानेरी”
मो 9680868028
