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Saturday, April 5, 2025, 5:06 am

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मायड़ भाषा दिवस पर नाचीज बीकानेरी का गीत

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एक हबीड़ों जोरां सूं मारो रे…

मीठी बोली रा मतवाळा अब तो जागो रे।
भाषा री मान्यता सारू बिगुल बजाओ रे।।
एक हबीड़ों जोरां सूं मारो रे……

बहरी-गूंगी सरकार नैं,सगळा मिल हिलाओ रे।
पन्द्रह करोड़ लोगां री भाषा नै मान्यता दिलाओ रे।।
एक हबीड़ों जोरां सूं मारो रे…….

खाली बातां अर दिलासां सूं , पेट नीं भरणों रे।
कोच्छा टांगलो सगळा भायां,अबै दिल्ली घेरो घालो रे।।
एक हबीडो जोरां सूं मारो रे…..

सांसद-विधायकां सूं कीं नीं होणो-जाणो रे ।
कवि-लेखकां अर लिखारां एक हबीडो मारो रे।।
एक हबीडो जोरां सूं मारो रे …..

पंच-सरपंच सगळा भेळा होय अलख जगाओ रे।
ठेठ गांव-ढाणी सूं भाषा री अलख जगाओ रे।।
एक हबीडो जोरां सूं मारो रे…….

स्कूल-कालेजां में मान्यता सारू धुणी धुखाओ रे।
मोटयारां नैं भेळा कर संसद रो घेरो घालण चालो रे।।
एक हबीडो जोरां सूं मारो रे ……

मायड़ भाषा सारू तन-मन-धन सूं सगळा लागो रे।
“नाचीज”रो कैवणो आरपार री लड़ाई मांडो रे।।
एक हबीडो जोरां सूं मारो रे …..

मईऩुदीन कोहरी ” नाचीज़ बीकानेरी”
मो 9680868028

Rising Bhaskar
Author: Rising Bhaskar


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