(देवयानी कादिर परवीन का फाइल फोटो। )
इस्लामाबाद से डीके पुरोहित की विशेष रिपोर्ट
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को 30 मई 2019 को शपथ ग्रहण समारोह में बम से उड़ाने की जो साजिश रची गई थी, उसका खुलासा उदित भास्कर डॉट कॉम पर 29 जुलाई 2022 को किया गया था। पता चला है कि इस पूरे प्रकरण की मास्टर माइंड देवयानी कादिर परवीन नाम की एक महिला थी। यह महिला गाजी फकीर नाम के जैसलमेर के इंटरनेशनल डॉन के संपर्क में थी और सीमा पार से होने वाली हथियारों और आरडीएक्स की तस्करी में संदिग्ध भूमिका रही है। यह महिला पाकिस्तान से अपना नेटवर्क चलाती रही है। इस समय इसकी उम्र करीब 89 साल है और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर दबाव पड़ने से भूमिगत हो गई है।
देवयानी कादिर परवीन बहुत ही खतरनाक आतंकवादी है। 1990 के दशक में इसका सीमा पार से होने वाली मादक पदार्थों और हथियारों के साथ आरडीएक्स की सप्लाई में एकछत्र राज रहा है। यह भी पता चला है कि जैसलमेर-बाड़मेर सीमा पर इसका शुरु से ही दबदबा रहा है। जैसलमेर के तत्कालीन एसपी रह चुके भगवान लाल सोनी के समय भी यह महिला सीमा पार अवांछनीय गतिविधियों में सक्रिय रही है। परवीन का संबंध जैसलमेर से रहा है। यह पुष्करणा परिवार से बताई जाती है। बाद में भागकर पाकिस्तान चली गई और वहां मुस्लिम डॉन कादिर परवीन से निकाह कर लिया और इस्लाम स्वीकार कर लिया। देवयानी नाम में उसने अपने पति का नाम भी साथ में जोड़ दिया। देवयानी कादिर परवीन के काले धंधों में रुचि लेने लगी। बाद में एक मुठभेड़ में कादिर परवीन की मौत हो गई पर देवयानी ने अपने पति के काले कारोबार को आगे बढ़ाया।
देवयानी का गाजी फकीर के साथ भी संबंध रहा है। सीमा पार से देवयानी कई बार मादक पदार्थों की खेप भेज चुकी है। यही नहीं यदा कदा आरडीएक्स सप्लाई करने में देवयानी का सक्रिय सहयोग रहा है। जब तत्कालीन पुलिस अधीक्षक पंकज चौधरी ने गाजी फकीर की हिस्ट्रीशीटर की फाइल खोली तो उस फाइल में पता चला है कि देवयानी का भी जिक्र आया था। मगर इन रिश्तों की परत उघड़ती इससे पहले ही रातों रात पंकज चौधरी का राजनीतिक प्रेशर के चलते ट्रांसफर हो गया। बाद में फाइल से देवयानी का नाम रातो-रात गायब हो गया। इधर पंकज चौधरी के ट्रांसफर होने के बाद गाजी फकीर की फाइल फिर से बंद हो गई।
29 जुलाई 2022 को उदित भास्कर डॉट कॉम में प्रकाशित समाचार पर एक नजर
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को 30 मई 2019 को शपथ ग्रहण समारोह में बम से उड़ाने की साजिश रची गई थी, मोहब्बत पेइंग गेस्ट में रुके थे आतंकी, जो अब बंद हो चुका है
आईएसआई के एजेंट मोहम्मद मोइन कानिया ने पांच आतंकियों मुहम्मद गजनेरी, अबुल मोखरी, सत्तार सताया, रिजवान खूटीं, सल्लाई खान के साथ मिल किया था प्लान। विस्फोटक से भरी कार ट्रैफिक में फंस गई और बाद में उसके दो टायर पंक्चर होने से आतंकियों की प्लानिंग धरी रह गई। इस शपथ ग्रहण समारोह में राष्ट्रपति भवन में हुए शपथ ग्रहण समारोह में सात से आठ हजार मेहमान मौजूद थे। इसमें भारत और छह अन्य देशों के संगठन बिमस्टेक के सभी देशों-नेपाल, भूटान, बांग्लादेश, श्रीलंका, म्यांमार और थाईलैंड के नेता भी मौजूद थे। इनके अलावा मॉरिशस और किर्गिस्तान से भी मेहमान शामिल हुए थे। गौरतलब है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इमरान खान को आमंत्रित नहीं किया था। अमेरिकी जासूस एल. विक्टर की पड़ताल में नया खुलासा सामने आया, भारी नरसंहार की प्लानिंग थी
न्यूयार्क से ओम गौड़ की विशेष रिपोर्ट
हिन्दुस्तान के चहेते और देश-दुनिया में भारत का मान बढ़ाने वाले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के दूसरी बार प्रधानमंत्री बनने से बोखलाए पाकिस्तान ने मोदी को 30 मई 2019 को उनके शपथ ग्रहण समारोह में ही बम से उड़ाने की साजिश रची थी। उस समय कितना नर संहार होता यह कल्पना ही की जा सकती है। यह सब साजिश प्रधानमंत्री मोदी की हत्या के उद्देश्य से की गई थी। इसका खुलासा अमेरिकी जासूस एल. विक्टर की पड़ताल से हुआ है।
राष्ट्रपति भवन में हुए शपथ ग्रहण समारोह में सात से आठ हजार मेहमान मौजूद थे। इसमें भारत और छह अन्य देशों के संगठन बिमस्टेक के सभी देशों-नेपाल, भूटान, बांग्लादेश, श्रीलंका, म्यांमार और थाईलैंड के नेता भी मौजूद थे। इनके अलावा मॉरिशस और किर्गिस्तान से भी मेहमान शामिल हुए थे। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इमरान खान को आमंत्रित नहीं किया था। जासूस विक्टर की पड़ताल को बताने वाली एक डायरी से पता चलता है कि प्रधानमंत्री मोदी की दूसरी पारी की सफलता से बोखलाई पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी आईएसआई के एजेंट मोइन कानिया ने प्रधानमंत्री मोदी के शपथ ग्रहण समारोह में बड़ा धमाका करने की साजिश रची थी। इसका एक मात्र मकसद मोदी को मौत की नींद सुलाना था। इस विस्फोट में कई लोगों के साथ मोदी को खत्म करने की प्लानिंग थी, मगर विस्फोट से भरी कार ट्रैफिक में फंस जाने और कार के दो पहिए पंक्चर हो जाने से विस्फोटक समय पर नहीं पहुंच पाए। और यह आतंकी हमले की साजिश संयोग से सफल नहीं हो पाई।
विक्टर की डायरी से ज्ञात होता है कि आईएसआई एजेंट मोइन कानिया ने पांच आतंकियों मुहम्मद गजनेरी, अबुल मोखरी, सत्तार सताया, रिजवान खूटीं, सल्लाई खान के साथ मिलकर मोदी के शपथ ग्रहण समारोह में विस्फोट कर उनकी हत्या की साजिश रची थी। लेकिन संयोगवश वह सफल नहीं हो पाई। ये पांचों आतंकी जिस मोहब्बत पेइंग गेस्ट में रुके थे वो अब बंद हो चुका है। विक्टर की डायरी से पता चलता है कि उस साजिश को ‘मोदी मोहब्बत’ कोड वर्ड दिया गया था। विक्टर की पड़ताल के मुताबिक पाकिस्तान को मोदी के बढ़ते कदम से खतरा महसूस हो रहा था। ऐसे में उनको शपथ ग्रहण समारोह में ही उड़ाने की साजिश रची गई।
देवयानी कादिर परवीन ने भेजा था आरडीएक्स, सभी आतंकवादी उसके गुर्गे थे
राइजिंग भास्कर की पड़ताल में सामने आया है कि देवयानी कादिर परवीन ने ही यह आरडीएक्स हिन्दुस्तान भेजा था। जानकारी मिली है कि यह आरडीएक्स पश्चिमी बार्डर से भेजा गया था और उसमें बीएसएफ के जवानों की भूमिका भी संदिग्ध बताई जा रही है। इस पूरे प्रकरण में जैसलमेर के भूमिगत तस्करों के नाम भी सामने आ रहे हैं। कई तस्कर अब होटलों और पर्यटन व्यवसाय में लग गए हैं। अभी भी पर्यटन व्यवसाय की आड़ में तस्करी और राष्ट्र विरोधी गतिविधियां जारी हैं। यही नहीं बीएसएफ के जवानों को भी हनी ट्रेप के जरिए फंसाया जा रहा है। पूर्व में कई बीएसएफ जवान हनी ट्रेप के जरिए राष्ट्र विरोधी गतिविधियों में पकड़े भी गए हैं।
कौन है देवयानी कादिर परवीन?
देवयानी जैसलमेर में पुष्करणा परिवार की बेटी बताई जा रही है। इसका बाल विवाह हो गया था। उसके पति की मौत के बाद उसे अपशुगनी मानकर घर से निकाल दिया गया था। बताया जाता है कि जब उसे घर से निकाला गया तब मुस्लिम लोगों ने उसे सहारा दिया था। बाद में देवयानी आपराधिक गतिविधियों में लिप्त हो गई। 1960 के आसपास देवयानी पाकिस्तान चली गई। वहां जाकर उसने कादिर परवीन नामक आपराधिक गिरोह के सरगना से शादी कर ली। तब उसने देवयानी के नाम के पीछे अपने पति का नाम कादिर परवीन लगाना शुरू कर दिया। जब कादिर परवानी की मुठभेड़ में मौत हो गई तो उसके काले कारनामों को उसने आगे बढ़ाया और अपराध की दुनिया की बेताज बादशाह बन गई। इन दिनों देवयानी कादिर परवीन को कई तरह की बीमारियों ने घेर लिया है। उसके गुर्दे खराब हो चुके हैं और कई बार निजी अस्पताल में उसका डायलिसिस भी हो चुका है। यही नहीं उसे तीन बार कोरोना भी हो चुका है। बीपी की तकलीफ उसे भंयकर है। उसके काले कारनामों की लंबी फेहरिस्त है। हिन्दुस्तान के विभिन्न भागों में समय-समय पर हुए बम धमाकों में उसकी सक्रिय भूमिका रही है। मगर यह अपने शातिर दिमाग से कभी सामने नहीं आई। इसके बारे में केवल जैसलमेर के तत्कालीन एसपी पंकज चौधरी को जानकारी थी और वे किसी नतीज तक पहुंचते इससे पहले ही पॉलीटिकल प्रेशर के चलते उनका ट्रांसफर हो गया और आज दिन तक तक देवयानी कादिर परवीन का राज राज ही रहा।
