पंकज जांगिड़. जोधपुर
प्रकृति-मानव केंद्रित जन आंदोलन की अखिल भारतीय कमेटी की तीन दिवसीय विस्तृत बैठक का आयोजन (1 से 3 मार्च) चौपासनी हाउसिंग बोर्ड में हुआ। इस कमेटी में 30 सदस्य हैं, आंदोलन के संविधान के मुताबिक हर 3 महीने में एक बैठक करना अनिवार्य है। जोधपुर की बैठक को विस्तृत बैठक के रूप में आयोजित किया गया है, जिसमें उन विशेषग्यों को भी शामिल किया जाता है जो इसकी कमेटी के सदस्य नहीं होते। बैठक में कमेटी सदस्यों के अलावा 20 अन्य महानुभाव पर्यवेक्षक के रूप में शामिल हुए। इस प्रकार विस्तृत बैठक में कुल 55 मनुभाव प्रतिभागी बने।
बैठक की शुरुआत में कमेटी के सचिव सुखदेव सिंह ने पिछली बैठक से अब तक प्रकृति- मानव केंद्रित जन आंदोलन द्वारा की गई गतिविधियों की रिपोर्ट प्रस्तुत की। जिसमें सज्जन कुमार, आर.के. मेघवाल, घनश्याम, विक्रमजीत सिंह, राधेश्याम बबलू, जयप्रकाश उपाध्याय, भूपति आर्य ने सहयोग किया। कमेटी के अध्यक्ष गिरधारी राम ने बैठक का एजेंडा पेश करते हुए उसमें कोई बिंदु जोड़ने अथवा घटाने यानी संशोधन करने का सुझाव भी दिया। उसमें मामूली संशोधन के साथ एजेंडा विचार विमर्श के लिए सर्व सहमति से स्वीकार कर लिया गया। एजेंडा को पूर्व में सभी सदस्यों को भेजा जा चुका था। गतिविधियों की रिपोर्ट पेश करते हुए सुखदेव सिंह ने कहा कि प्रकृति-मानव केंद्रीय जन आंदोलन के नेपाल सम्मेलन, जो पोखरा में आयोजित हुआ, उसमें कमेटी ने तीन सदस्य डेलिगेशन पर्यवेक्षक के रूप में भाग लेने के लिए भेजा। पंजाब में खेती-बाड़ी एवं किसानों के हित में जन जागरण अभियान एक महीने चलाया गया। अभियान में चल रहे विकास मॉडल की दिशा पर्यावरण को खराब करने और कृषि को बर्बाद करने तथा आम जनता के प्रतिकूल होने की बातें, गांव-गांव में छोटी मीटिंगों के जरिए बताई गई। सुखदेव सिंह ने कहा कि बड़े ताम-झाम के बिना, एक-दो कारों तथा 5-7 स्कूटर के जरिए, प्रतिदिन हम पांच गांवों में मीटिंग करते हैं। दो-तीन साथी एडवांस में गांव में जाते है, मीटिंग की सूचना दे देते हैं और पीछे वाली टीम वहां पहुंच जाती है। औसत 2 से ढाई घंटे में हम एक गांव की मीटिंग कर लेते। मीटिंग में हम पर्चा बांटते है, हम लोगों से सवाल करते की जो विकास गांव में और शहरों में हो रहा है उससे क्या धरती पर जीवन बचेगा? क्या हम हवा को प्रदुषित करके, पानी को हद दर्जे तक गंदा करके, भोजन को जहरीला बनाकर हमारी अगली पीढ़ी, जेनरेशन या हमारे बच्चों को कैसा वातावरण विरासत में छोड़कर जा रहे हैं? हमारे विकास ने वातावरण में ग्रीन हाउस गैसों को भारी मात्रा में छोड़कर वातावरण का तापक्रम 1.5 डिग्री सेल्सियस से अधिक औसत बढ़ा दिया है। यह औसत सन् 1880 के बाद औसत बड़ा है जिससे मौसम में परिवर्तन हो रहा है,हमारा कृषि उत्पादन घट रहा है।
गांव की मीटिंग में हम इस बात पर जोर देते थे कि यह विकास हमें कुछ सुविधा तो दे रहा है लेकिन बदले में हमारे जीवन को ही खतरे में डाल रहा है। पृथ्वी पर मानव सहित संपूर्ण जीव- जगत के अस्तित्व को ही मिटाने जा रहा है। सचिन ने बताया कि हमारा जन आंदोलन भारत में मंदिर-मस्जिद मुद्दे को उठाकर लोगों में फूट, हिंसा, नफरत के माहौल बनाने के प्रति पहले से ही गंभीर रहा है। बाबरी मस्जिद के बाद ज्ञानवापी में सर्वे तथा खासकर अजमेर की दरगाह के नीचे शिव मंदिर होने का सर्वे करवाने का केस जब अजमेर की जिला अदालत में लगाया गया,तब हम इसे गंभीरता से लेते हुए एक छोटा पर्चा निकला। अजमेर में वकीलों, बुद्धिजीवियों, चर्च के बिसप एवं अधिकारियों, बुद्धिस्ट धर्म को मानने वालों तथा खासकर दरगाह शरीफ के प्रबंध मंडल के सदस्यों के साथ मीटिंगें की। आम लोगों में पर्चा बांटा गया है, लोगों में करीब 4000 पर्चें वितरित किए गए। जिसमें इतिहास की गलतियों का आज बदला लेने के सिद्धांत को जन विरोधी, राष्ट्र विरोधी, गैरउत्पादक तथा अप्रासंगिक बताया गया। लोगों से अपील की गई कि विवादों मतभेदों को वार्ता, सहयोग, सहमति, समझौता के शांतिपूर्ण तरीके से हल किया जावे।
सचिन ने रिपोर्ट किया कि हम विश्व स्तर के एजेंडे यानी हवा, पानी, भूमि,वातावरण में बिगाड़ और मानव समुदाय में स्वार्थ, लालच, गुटबंदी से हिंसा, तनाव, अविश्वास, डर के वातावरण को ठीक करने एवं इसके कारण और समाधान में लोगों की क्या भूमिका हो, इस पर हमने फैसला लिया कि इस पर बातचीत की शुरुआत हो,यह अपने घर के सदस्यों, मित्रों और जहां हम रहते हैं, मोहल्लों, शहरी वार्ड, और गांव में छोटी-छोटी मीटिंगें करके की जानी चाहिए। इस फैसले की अनुपालना जोधपुर सहित कई जिला इकाइयों ने की है। राजस्थान में खेजड़ी बचाओ, पर्यावरण बचाओ अभियान में प्रकृति- मानव केंद्रीय जन आंदोलन की राजस्थान इकाई ने सक्रिय सहयोग किया। एजेंडे के पहले बिंदु, गतिविधि रिपोर्ट के बाद अध्यक्ष गिरधारी राम ने एजेंडे के कुल नाम 9 बिंदुओं में से दूसरे बिंदु पर विचार विमर्श का आदेश दिया। पहले दिन चार बिंदु तथा दूसरे दिन एजेंडे के तीन बिंदुओं पर विचार विमर्श हुआ। तीसरे दिन एजेंडे शेष दो बिंदु रहे। जिस पर चर्चा रिपोर्ट लिखे जाने तक जारी थी।
तीसरे दिन चर्चा के दो बिंदु प्रकृति- मानव केंद्रीय जन आंदोलन के गठन सन 2002 से आज 2025 तक इसके संगठनात्मक काम का मूल्यांकन करना तथा आगे काम की क्या योजना है, पर विचार विमर्श करना है। बैठक की अध्यक्षता गिरधारी राम तथा संचालन सुखदेव सिंह ने किया मिनिट्स रिपोर्ट की जिम्मेदारी घनश्याम डेमोक्रेटिक ने निभाई। भवन, आवास एवं आम निगरानी व्यवस्था सी आर देपन एवं एल एल गुरु ने की। वित्तीय व्यवस्था की देखरेख भींयाराम जोया तथा भोजन व्यवस्था इंदाराम एम आर परमार ने की। जलपान व्यवस्था सांवलाराम एवं मंगलाराम बोस, श्रवण लाल ने की तथा शांति चौहान ने भोजन व्यवस्था में सहयोग किया। रिकॉर्डिंग, दस्तावेज आदि का प्रबंध अशफाक फौजदार, भूपेंद्र बोस एवं मनजीत मान ने की। विस्तृत बैठक में जम्मू-कश्मीर, पंजाब,दिल्ली,यू पी,महाराष्ट्र एवं राजस्थान के सदस्यों ने भाग लिया। कुल भागीदारों (सदस्यों एवं पर्यवेर्क्षों की संख्या) 55 थी। कर्नाटक, पश्चिम बंगाल,बिहार,आंध्र के सदस्यों की ट्रेन निरस्त होने तथा अन्य अपरिहार्य के कारणों से वे अनुपस्थित रहे।
