कहानीकार : मिश्रीलाल पंवार, वरिष्ठ पत्रकार एवं लेखक
इसी कहानी से…. ”तुम्हें कैसे मालूम कि मेरा मुन्ना बीमार है? नन्दिनी की बात सुन कर राहुल हंस पड़ा। वह अपने बेड पर बैठने की कोशिश करते हुए बोला, मुझे तो बहुत कुछ मालूम है। मैं तो यह भी जानता हूँ कि आप आज बाबा के पास गई थी। उसने बताया होगा कि आपकी जेठानी ने मुन्ने पर जादू टोना करवा दिया है। क्या मैं झूठ बोल रहा हूँ?….
अब पढ़िए आरंभ से
अस्पताल में चारों तरफ सन्नाटा पसरा हुआ था। नन्दिनी कैदी वार्ड में अपनी ड्यूटी दे रही थी। इस वार्ड में कुल पांच बेड थे। एक नम्बर बेड पर एक युवक था, बाकि चारों बेड खाली पड़े थे। उस युवक पर अपने ही ताऊ की हत्या का आरोप था। उसे उम्रकैद की सजा मिली थी। नन्दिनी ने बेड नंबर एक की तरफ देखा। युवक शायद नींद में था । उसकी तबीयत दिनों दिन बिगड़ती जा रही थी। उसने पिछले 5 दिनों से खाना तक नहीं खाया था। उसे गले का कैंसर था। कल ही डॉक्टर आपस में कह रहे थे कि वह कुछ ही दिनों का मेहमान है। नन्दिनी को खास तौर पर उस मरीज की देखभाल के लिए ही इस कैदी वार्ड में लगाया गया था। वह पिछले एक माह से इस मरीज की देखभाल में लगी हुई थी। नन्दिनी को ताजुब होता था कि एक महीने में उस कैदी से मिलने कोई रिश्तेदार क्यों
नहीं आया था।
खुद उसने कभी उसके बारे में पूछा तक नहीं था। वह सोचने लगी कि इतना शांत व सौम्य युवक किसी का हत्यारा कैसे हो सकता है। लगता है, इसे झूठा फंसाया गया है।
नन्दिनी ने उस कैदी की फाइल पर नजर डाली। उम्र 25 साल लिखी हुई थी और नाम था राहुल।
शक्ल सूरत से वह किसी अच्छे परिवार का लगता था। वह बहुत ही कम बोलता था। इस एक महीने में नन्दिनी ने उसे बोलते कभी नहीं देखा था। वह अक्सर सोता रहता।
यह एक महीना नन्दिनी के लिए बहुत बोझिल भरा रहा। कभी कभी सोचती कि इस कैदी के बारे में उस से बात करूं, मगर वह हिम्मत ही नहीं जुटा पाती ।
नन्दिनी मन ही मन न जाने क्या क्या सोचती रहती, अगर फोन की घंटी न बजी होती। उस ने रिसीवर उठाया और धीरे से बोली ”हेलो, कौन?
”मैं सरिता बोल रही हूं. उधर से एक मीठी आवाज सुनाई।
सरिता उसकी छोटी बहन थी।
बहन सरिता की आवाज सुनकर नन्दिनी बोली ,”अरे तू कहां गायब हो गई थी? सुबह से 20 बार फोन कर चुकी हूं । फोन क्यूं नहीं उठाती… तुमने उस बाबाजी से बात की या नहीं?
”हाँ, मैं बाबाजी के पास गई थी दीदी, लेकिन उन्होंने तुझे खुद बुलाया है। वैसे मेरा शक बिलकुल ठीक है। बाबाजी ने बताया कि किसी ने तेरे मुन्ने पर जादू टोना कर दिया है। मुझे तो तेरी जेठानी पर ही शक है। बाबाजी ने जादू टोने करने वाले का जो हुलिया बताया, वह तुम्हारी जेठानी से ही मिलता-जुलता है।
”नहीं सरिता, मेरी जेठानी ऐसा कतई नहीं कर सकती। वह मुन्ने को मुझ से भी ज्यादा प्यार करती है। मेरी जेठानी तो खुद बेचारी मुन्ने की बीमारी को लेकर बहुत परेशान है, उन पर शक करना घोर पाप होगा। मैं कल तुम्हारे साथ चलूंगी।
”ठीक है भई, मैंने ऐसा कब कहा कि तेरी जेठानी ने ही कुछ कराया है। मैंने तो अपना शक जाहिर किया था। आगे तुम जानो और तुम्हारा काम। कल तुम खुद चलना और बाबाजी के मुंह से ही सुन लेना,
नन्दिनी ने रिसीवर नीचे रखते हुए बेड नंबर एक की तरफ देखा। राहुल जाग रहा था। वह उसी को देख रहा था। नन्दिनी अंदर से पूरी तरह कांप उठी। शायद उस ने फोन पर हुई उसकी और सरिता की बात सुन ली थी। हमेशा अपने आप में खोया रहने वाला राहुल आज अचानक उस की बात सुना लेगा, उस ने कभी सपने में भी नहीं सोचा था।
वह दूसरे दिन वह बाबा से मिलकर सीधे अस्पताल पहुंची। उस का मन नहीं लग रहा था। कैदी वार्ड में कदम रखते हुए उस ने एक नजर बेड नंबर एक पर डाली। हमेशा की तरह वह कैदी आज भी सो रहा था।
डॉक्टर राउंड पर आकर चले गए थे।आज उस का अस्पताल आने का मन भी नहीं था। मुन्ने की तबीयत कुछ दिनों से ठीक नहीं थी। डॉक्टर का इलाज चल ही रहा था। मगर दवाओं का असर नहीं हो रहा था।
एक दिन छोटी बहन सरिता ने उसे जादू टोना वाले बाबा से पूछताछ कराने की सलाह दे दी। उस ने भी सोचा कि पूछताछ करने में क्या हर्ज है? उसे क्या मालूम था कि बाबा की बात उसे इस तरह अशांत कर देगी।
आज सुबह वह खुद बाबा के यहां गई थी ।बाबा ने कहा कि मुन्ने पर किसी ने जादू टोना कर दिया है। इशारे से बाबा ने यह भी बताया कि जादूटोना कराने वाला कोई नजदीकी रिश्तेदार हैं। हालांकि बाबा ने कहा था कि पांच हजार रुपए खर्च करने पर वह जादू टोने के असर को कम कर देगा।
नन्दिनी को पांच हजार रुपए की चिंता नहीं थी। उस का मन तो इस बात से दुखी था कि उस ने अपनी जेठानी को हमेशा ही बड़ी बहिन की तरह माना था। और वो मुन्ने पर ही जादू टोना करने चली थीं। अब तो वह कभी भी मुन्ने को उन के नजदीक नहीं जाने देगी।
”अब आप के मुन्ने की तबीयत कैसी है सिस्टर ?
अचानक ही यह आवाज सुन कर नन्दिनी का ध्यान टूटा। उस ने इधर उधर देखा।वार्ड में कोई नहीं था। तभी उस की नजर बेड नंबर एक की ओर गई। राहुल उसी की तरफ ही देख रहा था। नन्दिनी को अपनी तरफ देखते पा कर वह बोला, ”मैं ने ही आपसे पूछा था, अब आप का मुन्ना कैसा है?
”तुम्हें कैसे मालूम कि मेरा मुन्ना बीमार है? नन्दिनी की बात सुन कर राहुल हंस पड़ा। वह अपने बेड पर बैठने की कोशिश करते हुए बोला, मुझे तो बहुत कुछ मालूम है। मैं तो यह भी जानता हूँ कि आप आज बाबा के पास गई थी। उसने बताया होगा कि आपकी जेठानी ने मुन्ने पर जादू टोना करवा दिया है। क्या मैं झूठ बोल रहा हूँ?
”मगर तुम यह सब कैसे जानते हो ?
” पहले मेरी बात का जवाब दो कि क्या मेरी बात गलत है?
”तुम ठीक कह रहे हो। बाबा ने यही कहा है मैं ने तो सपने में भी नहीं सोचा था कि मुझ से भी ज्यादा प्यार जताने वाली मेरी जेठानी ही मुन्ने के साथ ऐसा करेंगी… कहते कहते हिना की आंखों में आंसू निकल पड़े।
”आप की जेठानी की कोई औलाद नहीं है क्या?
”नहीं… उनके संतान नहीं है। हम दोनों के बीच मुन्ना ही है। देखने से तो लगता था कि वे मुझे से भी ज्यादा मुन्ने को चाहती है। मुझे आज सुबह ही चमत्कारी बाबा ने बताया है, इसलिए आज रात को घर जा कर उनको सबक सिखाऊंगी।ÓÓ
”एक बात कहूं?
”हां, बोलो।
”आज अपनी जेठानी से कुछ मत कहना। मैं ने कल आप की और सरिता की बातें सुनी थी। उसी समय मैंने पूरे मामले को समझ लिया था। ऐसी बातों से सालों का प्यार एक पल में बिखर जाता है।
”तो तुम्ही बताओ कि मैं क्या करूं? सच कहूं, मैं तो पागल सी हो गई हूं।
”आप जब कल आएंगी, तब आप को मैं एक बात बताऊंगा। उस के बाद आप को जो ठीक लगे, वैसा करना। अपनी जेठानी से कुछ मत कहना।
दूसरे दिन नन्दिनी अस्पताल पहुंची, तब राहुल अपने बेड पर सो रहा था। आज उस की तबीयत कुछ ज्यादा ही ढीली थी।
राहुल की तबीयत देख कर नन्दिनी निराश हो गई और वहीं पर वह अपनी कुर्सी पर बैठ गई। वह राहुल को महीने भर से देख रही थी। आज जाने क्यों वह उसे अपना सा लग रहा था।
”सिस्टर, आप कब आई? अचानक राहुल ने पूछा तो उसका ध्यान टूटा। वह बोली,
”बस अभी अभी आई हूं।
”आप मेरे नजदीक आ कर बैठो सिस्टर, आप से जरूरी बात कहनी है।
नन्दिनी ने अपनी कुर्सी बेड के पास सरकाई और राहुल के पास आ कर बैठ गई। राहुल ने एक ठंडी सांस लेते हुए कहना शुरू किया, ”सिस्टर, क्या आप का कोई भाई है ?
”नहीं, मेरा कोई भाई नहीं है। बस, एक छोटी बहन है।
”आप मुझे अपना छोटा भाई मान कर मेरी बात गौर से सुनना… इन जादू टोनों ने अब तक ना जाने कितने घरों को बर्बाद कर के रख दिया है।
मेरा अपना परिवार भी उन में से एक है।
”मेरे पिताजी और उनके एकमात्र बड़े भाई का आपस में बहुत प्यार था। तकरीबन 5 साल पहले मेरे पिताजी को जाने क्या बीमारी लगी कि उन की हालत दिनों दिन बिगड़ती गई। मां ने किसी अच्छे डॉक्टर को नहीं दिखाया। लोगों के कहे कहे मां किसी झाड़ फूंक वाले बदमाश के चंगुल में आ गई।
”उस बदमाश ने माँ को बताया कि किसी नजदीकी रिस्तेदार ने पिताजी पर जादू टोना करवा दिया है। इस पर मेरी माँ को मेरे ताऊ पर शक होने लगा। मैं भी मां की तरह अपने ताऊ पर शक करने लगा था। आखिरकार एक दिन बस इसी बात को लेकर घर में झगड़ा हो गया। ताऊजी और मेरे परिवार में बोलचाल बंद हो गई। हम लोगों ने इलाज पर कम और झाड फ़ूंक पर ज्यादा ध्यान दिया। इसके चलते पिताजी का उपचार नहीं हो पाया। परिणाम यह हुआ कि ”एक दिन वे चल बसे। मुझे लगा कि मरे ताऊ ने उनको मार डाला है। मैं बदले की आग में जलने लगा। एक इन मौका पाकर में ने अपने ताऊ पर हमला कर दिया और उनको चाकुओं से गोदकर मार डाला।
”इस घटना के बाद पुलिस ने मुझे गिरफ्तार कर लिया। मुझ पर मुकदमा चला और उम्रकैद की सजा हो गई।
” मेरी इस गम को सहन नहीं कर पाई और एक दिन वह भी बसीं। इधर ताऊ की हत्या के बाद मेरी ताई पागल हो गई थी। वे आज भी गलियों में भीख मांग कर अपना पेट पाल रही है। इस अंधविश्वास की गहरी खाई में फंस कर मेरा पूरा घर बरबाद हो गया।
”सबकुछ खोने के बाद अब कहीं जा कर मुझे एहसास हुआ कि जादू टोना के झूठे भ्रमजाल में फंस कर मेरा परिवार तबाह हुआ था। इन जादू टोना करने वालों के पास जा कर आज तक किसी का भला नहीं हुआ है। इन लोगों के पास जाने का मतलब है अपनी बरबादी को खुद बुलाना।
”मैंने आपके और आपकी बहन सरिता की फोन वाली बातें सुनी थी। अपने घर जैसा मामला आप के साथ होते देखा, तो चुप नहीं रह सका… आप अपनी जेठानी पर शक करना बंद करें। मुन्ने का ठीक से इलाज करवाएं, अस्पताल से छुट्टी लेकर आप खुद मुन्ने की देखभाल करें।बाबा और फकीरों का चक्कर छोड़ें । मैं जानता हूँ कि मेरी जिंदगी अब कुछ दिनों की मेहमान है…. मरता आदमी अपने आखिरी समय में कभी झूठ नहीं बोलता… प्लीज, मुझ से वादा करें कि आप मेरी बात मानेंगी।
राहुल से वादा कर के नन्दिनी घर लौट आई। उस ने एक हफ्ते की छुट्टी लेकर मुन्ने का इलाज करवाया। इस दौरान मुना एकदम ठीक हो गया।
आज उसकी छुट्टी का आखिरी दिन था। नन्दिनी ने बाजार से एक राखी खरीदी, मुन्ने को गोद में लेकर वह बोली, ”चल आज तुझे तेरे मामा से मिलवाती हूं।
नन्दिनी मुन्ने के साथ अस्पताल पहुंची, तो देखा कि कैदी वार्ड के बाहर लोगों की भीड़ लगी हुई थी। वह दौड़ कर वार्ड में गई, तो देखा कि स्टाफ के लोग राहुल के बैंड को घेरे खड़े थे। उस पर सफेद कपड़ा डाला हुआ था। राहुल दुनिया छोड़कर जा चुका था
नन्दिनी की आंखों से आंसू बह निकले। उस ने अपनी पर्स में रखी राखी निकाली और सफेद चादर पर रख दिया। जेल के मुलाजिम राहुल की लाश को लेकर बाहर जाने लगे, यह देख नन्दिनी वहीं गिर पड़ी। वह फूट-फूट कर रोने लगी। लगा कि जाते जाते राहुल उसे अंधविश्वास की गहरी खाई में गिरने से बचा लिया।
