अभी चैत्र माह का कृष्ण पक्ष चल रहा है, पहली रिपोर्ट राइजिंग भास्कर के रिपोर्टर पारस शर्मा की दृष्टि से जो अकादमी के कृष्ण पक्ष से संबंधित है। दूसरी रिपोर्ट अकादमी के शुक्ल पक्ष की जो अभी चल नहीं रहा है, मगर हमारे फोटो जर्नलिस्ट शिव वर्मा के कैमरे ने कैद किया। हम यहां पाठकों को दोनों ही नजारे दिखा रहे हैं।
पारस शर्मा की विशेष रिपोर्ट. जोधपुर
राजस्थान संगीत नाटक अकादमी फिर से विवाद में है। इस बार आरोप लगाया जा रहा है कि कलाकारों के साथ फिर अन्याय हुआ और अकादमी का बजट लगातार दूसरे साल लैप्स हो गया। अकादमी की पूर्व अध्यक्ष बिनाका जैस मालू ने आरोप लगाया कि राजस्थान संगीत नाटक अकादमी 17 माह से निष्क्रिय पड़ी है।
उन्होंने कहा कि हमने 18 माह में लोकानुरंजन सहित संगीत नृत्य नाटकों के छ सौ से अधिक राज्य, राष्ट्रीय व अंतरराष्ट्रीय स्तर के आयोजन किए। तथा विविध योजनाओं के माध्यम से प्रदेश के 30 हज़ार से अधिक कलाकारों को लाभान्वित किया था। वहीं वर्तमान में सारी योजनाएं ठप्प पड़ी है। नाम मात्र के दो आयोजन वो भी क्षेत्रीय सांस्कृतिक केंद्रों की मदद से ही किए जा सके हैं l
राज्य की कला संस्कृति के संरक्षण एवं संवर्धन का दायित्व निर्वहन करने वाली राजस्थान संगीत नाटक अकादमी के 17 माह की निष्क्रियता से प्रदेश भर के कला प्रोत्साहन का बजट दूसरे वर्ष भी लैप्स हो गया है l कला संस्कृति मंत्री के ही वित्तमंत्री होने के बावजूद इस वर्ष राज्य के बजट में संस्कृति प्रोत्साहन के कोई विशेष प्रावधान नहीं किए गए हैं l
100 करोड़ की कलाकारों को 100 दिन रोजगार की योजना बंद कर दी
बिनाका ने कहा कि जबसे प्रदेश में भाजपा सरकार बनी है, तब से अकादमी बेहाल और लाचार हो गई हैं। यहां न कोई नियमित सचिव है और न ही स्टाफ। प्रदेश के कलाकारों व संस्कृतिककर्मियों की कोई सुनने वाला नहीं हैं। सभी कार्यक्रम व योजनाओं को ठंडे बस्ते में डाल दिया गया है। विशेष रूप से पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत द्वारा 100 करोड़ रुपयों के प्रावधान से प्रारंभ की गई कलाकारों को वर्ष में 100 दिन रोजगार देने की देश की पहली गारंटी व वाद्ययंत्र खरीद सहायता जैसी महत्वाकांक्षी योजना भी बंद कर कर दी गई है l जरुरतमंद कलाकारों को आर्थिक सहायता प्रदान करने वाला कल्याण कोष से सहायता भी बंद हैl
टाउन हॉल के शेष विकास कार्य अधूरे छोड़ दिए
बिनाका ने कहा कि जोधपुर का एक मात्र प्रदर्शन योग्य प्रेक्षागृह जयनारायण व्यास टाउनहाल, जिसे पूर्व मुख्यमंत्री गहलोत ने साढ़े ग्यारह करोड़ रुपयों की राशि स्वीकृत कर इसका विस्तार व आधुनिकीकरण करवाया था, लेकिन सरकार बदलते ही इसके शेष कार्य अधूरे छोड़ दिए गए हैं। जिससे आयोजकों व कलाकारों को अनेक असुविधाओं का सामना करना पड़ रहा है l यहां एक इलेक्ट्रिशियन भी नहीं हैं, जिससे करोड़ो रुपयों से लगाए गए साउंड लाइट के उपकरण उपयोग में नहीं आ रहे हैं। साथ ही दुर्घटना की आशंका बनी रहती है l उन्होंने कहा कि किसी भी सरकार को कला साहित्य संस्कृति जैसे विषयों को राजनीतिक चश्मे से नहीं देखना चाहिए, क्योंकि ये जीवन व अभिव्यक्ति के आवश्यक सरोकार हैं, जिसे प्रोत्साहित करना सरकार की नैतिक जिम्मेदारी हैl
हमने अशोक उद्यान में लोकानुरंजन मेला किया, 1 लाख लोगों ने देखा : बिनाका
बिनका ने कहा कि जोधपुर में आयोजित होने वाले राज्य के सबसे बड़े कला कुंभ लोकानुरंजन मेले को संकुचित कर दिया गया। इसे अशोक उधान में आयोजित नहीं करने पर निराशा प्रकट करते हुए उन्होंने कहा कि जिस कार्यक्रम को राष्ट्रीय स्वरूप देते हुए हमने अशोक उद्यान के विशाल प्रांगण और खुले रंगमंच पर भव्यता से आयोजित किया था। उसे एक लाख से अधिक दर्शकों ने देखा था। उसे इस बार पुन: टाउनहॉल की परिधि में समेट देना अकादमी की निष्क्रियता को ही दर्शाता है l
टाउन हॉल और मुक्ताकाश मंच में कलाकारों का जलवा, विदेशी सैलानी भी पहुंचे
शिव वर्मा की लाइव रिपोर्ट. जोधपुर
लोकानुरंजन फिर अपने रंग में है। राजस्थान की सांस्कृतिक राजधानी जोधपुर में इन दिनों देश की लोक संस्कृति का महासंगम देखा जा रहा है। जयनारायण व्यास टाऊन हॉल में लोकानुरंजन मेले में जोधपुर सहित देसी विदेशी सैलानी भी जमकर लुत्फ़ उठा रहे हैं। राजस्थान संगीत नाटक अकादमी के सचिव अज़ीत सिंह राजावत ने बताया कि सोमवार को मेले के दूसरे दिन भी दर्शकों का उत्साह चरम पर था। स्थानीय दर्शकों के साथ सैलानी भी जहां लोकानुरंजन मेले का भरपूर आनंद ले रहे थे, वहीं सेल्फी और फ़ोटोग्राफ़ी का भी पूरा मज़ा ले रहे थे। दो चरणों में हो रहे इस मेले की सहभागिता में पश्चिम सांस्कृतिक केंद्र, उत्तर मध्य सांस्कृतिक केंद्र प्रयागराज, चंडीगढ़ संगीत नाटक अकादमी, उत्तर सांस्कृतिक केंद्र भी हैं।
मुक्ताकाश तले लोक कलाकारों से अभिभूत हुए दर्शक
पहले चरण में खुले आकाश के नीचे बनाए 12 मंचों पर तथा परिसर में फैले हुए लोक कलाकारों को नजदीक से देखकर दर्शकों ने भरपूर आनंद लिया। विभिन्न रूप धारण किए हुए बहरूपिए, मदारी, जादूगर, कठपुतली, भोपा भोपी, शहनाई नगाड़ा वादन, लाल व सफ़ेद आंगी गेर, बंब वादन, तेरहताली, घूमर, भपंग वादन, सहरिया और ढोल बांकिया वादन के साथ कच्छी घोड़ी ने भी अद्भुत रंग जमाए।
प्रेक्षागृह के भीतर लोक कलाकारों ने जमकर कला दिखाई
खुले प्रांगण के बाद जब दूसरे चरण में प्रेक्षागृह के भीतर लोक कलाकारों ने प्रदर्शन किया तो भारी संख्या में लोग उतना ही लुत्फ़ उठा रहे थे। दूसरे चरण का शुभारंभ अंतरराष्ट्रीय ख्याति प्राप्त सिकंदर खान लंगा साथियों के स्वरों में सुनकर लोगों ने तालियां बजाकर स्वागत किया। जम्मू कश्मीर की रुतबा नईम सखियों ने रूफ नृत्य से रंग जमाया तो वहीं जब गुजरात की अल्ताफ़ सिद्धि कलाकारों ने सिद्धि धमाल नृत्य प्रस्तुत किया तो दर्शक सांसें रोके चमत्कारिक प्रस्तुति देखते रह गए। बालोतरा के रामचंद्र का डांडिया के बाद जब महाराष्ट्र के अंबादास गवली सोंगी मुखौटा का अलौकिक प्रदर्शन लेकर आए तो आध्यात्मिक और लोक कला का अद्भुत संगम दिखाई दिया। इसके अलावा ममतादेवी चाचौड़ा का चकरी नृत्य, महाराष्ट्र का श्रद्धा सखियों का लावणी, अपानाथ का कालबेलिया, विजय शर्मा की फूलों की होली और पंजाब के गुरप्रीत पलाहा के लूगी नृत्य का भरपूर आनंद लिया गया। कार्यक्रम अधिकारी अरुणसिंह चारण और रमेश कंदोई ने संयोजन तथा प्रमोद सिंघल ने संचालन किया।
