(नाचीज बीकानेरी जाने माने कवि-साहित्यकार हैँ। आप बीकानेर के निवासी हैं और बीकानेर में रहकर साहित्य साधना कर रहे हैं। राजस्थानी में आपकी कविताएं काफी चर्चित रहती हैं। आपकी कई पुस्तकें प्रकाशित हो चुकी हैं और कई सम्मान भी मिल चुके हैं। आप राइजिंग भास्कर के पाठकों के लिए राजस्थान दिवस तक यानी 30 मार्च तक रोज एक कविता लिखेंगे। आज प्रस्तुत है दूसरी कविता- आ’ मरुधरा )
आ ‘ मरुधरा
आ ‘ धरती मां
सदा सवाई रैवै
परदेसां मांय इयै रो बखाण
सदा सवायो रैवै अ ‘रो नाम
आ ‘राजस्थानी धरा मरुधरा
घणी प्यारी आ ‘धरा
इयै रा काचर – बोर – मतीरा
खावै टाबर-टोळी भाई- बीरा
पूत – सपूत अठैरा
माण देस रो राखै
प्राण जावै तो जावै
रण में पाछ नी राखै
सोवणी धोरां री आ ‘ धरा
आखै मुलकां में सराइजै
मीठी बोली री आ ‘ धरा
आप रै गुणा सूं सराइजै
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नाचीज बीकानेरी
