राजस्थान, गुजरात, हरियाणा, मध्यप्रदेश, पंजाब, महाराष्ट्र, जम्मू कश्मीर, उत्तराखंड और उत्तरप्रदेश के कलाकारों का प्रदर्शन सातवें आसमान पर रहा
शिव वर्मा. जोधपुर
लोक कलाकारों के साथ तीन दिनों तक यहां के सैलानियों, स्थानीय दर्शकों के ऐसे पल बने हैं कि लोक कलाकार और लोग अंतिम दिन होने के कारण भावुक हो गए। एक दूसरे से प्यार, अपनापन और फ़िर मिलेंगे के वादे के साथ विदाई का आलम देखने लायक बन गया। जोधपुर में तीन दिनों तक चले लोकानुरंजन मेले में 9 राज्यों के 800 लोककलाकारों ने अपने फन और कला का अद्भुत प्रदर्शन किया। राजस्थान संगीत नाटक अकादमी के सचिव अज़ीत सिंह राजावत ने बताया कि पश्चिम सांस्कृतिक केंद्र प्रयागराज, चंडीगढ़ संगीत नाटक अकादमी, उत्तर सांस्कृतिक केंद्र की साझेदारी में इस मेले में इस बार भी लोगों ने जमकर लुत्फ़ उठाया। मेले में राजस्थान के विभिन्न जिलों के साथ गुजरात, हरियाणा, मध्यप्रदेश, पंजाब, महाराष्ट्र, जम्मू कश्मीर और उत्तराखंड व उत्तरप्रदेश के कलाकारों ने शानदार प्रदर्शन किया।
अंतिम दिन खुले आकाश तले जोश के साथ प्रदर्शन हुआ
आज भी मदारी टीम ने स्वांग रचे और लोगों को अनुकूल हुंकार भरी। पात्रों से एंकर प्रमोद सिंघल ने मज़ेदार सवाल भी पूछे। जादूगर के खेल का भी भरपूर एंजॉय किया तो वहीं डांडिया, आंगी गेर, कच्छी घोड़ी, करतब, शहनाई, तेरहताली, ढोल वादन, भपंग, भवाई, कालबेलिया और विभिन्न प्रदेशों के लोक नृत्यों का भी पूरा आनंद लिया गया।
प्रेक्षागृह में हुआ शानदार प्रदर्शन
अंतिम दिन के दूसरे चरण में भंवरुखान लंगा और भुगंडे ख़ान मांगणियार ने ताल कचहरी का लाज़वाब प्रदर्शन किया। बलवीर सिंह ने गढ़वाली नृत्य, यूसुफ खान मेवाती ने भपंग वादन से समा बांध दिया। राधा सखियों ने चरी नृत्य, रेणु हरियाणा ने घूमर, गुरप्रीत पहाला ने लूदी नृत्य, जेसी जडेजा गुजरात ने अंतराग नृत्य, गोपालराम पाबूसर ने चंग और श्रद्धा सतविकर ने लावणी के साथ विजय शर्मा ने फूलों की होली कार्यक्रमों से धूम मचा दी। कार्यक्रम में भंवरलाल प्रजापति का गेर नृत्य के साथ जम्मू कश्मीर का रुतबा नईम ने रऊफ नृत्य भी शानदार रूप से प्रस्तुत किया। आज महापौर वनिता सेठ ने भी मेले का अवलोकन किया। इस अवसर पर अकादमी के कार्यक्रम अधिकारी अरुणसिंह चारण और रमेश कंदोई ने संयोजन किया। संचालन प्रमोद सिंघल ने किया।
