Explore

Search

Sunday, August 23, 2026, 12:18 pm

Sunday, August 23, 2026, 12:18 pm

LATEST NEWS
[wonderplugin_slider id=1]
Lifestyle

नाचीज बीकानेरी की राजस्थान दिवस तक रोज पढिए एक कविता

(नाचीज बीकानेरी वरिष्ठ साहित्यकार हैं। आप बीकानेर के निवासी हैं और बीकानेर में रहकर इन दिनों साहित्य साधना कर रहे हैं। आपकी रचनाएं कई पत्र-पत्रिकाओं में निरंतर प्रकाशित होती रहती है। आपकी कई पुस्तकें प्रकाशित हो चुकी है और कई सम्मान भी मिल चुके हैं। आपकी राजस्थान दिवस तक रोज एक कविता राइजिंग भास्कर के पाठकों को पढ़ने को मिलेगी। आज पढिए तीसरी कविता- म्हारो प्यारो राजस्थान )

म्हारो प्यारो राजस्थान

प्यारो घणो लागै
भालो घणो लागै
देस विदेसां में अ’रा बखाण
प्यारो घणो म्हारो राजस्थान ।

हिंवड़ै रो हार है
माथै रो मुकुट है
वीर सपूतां री स्यान
म्हारो प्यारो राजस्थान ।

उंडो पाणी पिवणियां
गहरा घणा है लोग
बख्त पड्यां देवै ज्यांन
प्यारो घणो राजस्थान ।

इतिहास भरै है साख
लुगायां लाज भढाई
पन्ना-पदमण-मीरां री पहचाण
रंग – रूड़ो घणो राजस्थान ।

भक्ति – शक्ति री जामण
प्रताप – दुर्गादास री भागण
वीर -शहीद अ’ रै पर कुर्बान
प्यारो घणो म्हारो राजस्थान ।

खनिज सम्पदा सूं भरपूर
अरावली खड्यो है सीनो ताण
गुरु-शिखर म्हारो स्वाभिमान
भालो घणो म्हारो राजस्थान ।

मेळा – मगरिया, तीज – तिंवार
इक दूजै री हरख सूं करै मनवार
सांस्कृतिक सौहार्द रा घणा गुणगान
प्यारो घणो- भालो घणो राजस्थान ।

मिनखपणै अर भाईचारे री मिसाल
ईद – दिवाळी गळै मिळै हर साल
रामसा – पीर राजस्थान री है स्यान
घणो प्यारो-घणो दुलारो राजस्थान ।

ऊंचै – ऊंचै धोरां री अठै भरमार
दुर्ग – किला – महल अठै बेशुमार
सैलानयां नै अणुतो मिळै है माण
उज्ळै -उज्ळै धोरां रो राजस्थान ।

जाम्भो-तुलसी ,कपिल-करणी जठै
सूफी-चिस्ती ,पुष्कर-सिरी नाथ अठै
धीरां – पीरां रो प्यारो-प्यारो राजस्थान
बांकड़लै वीरां रो बांकड़लो राजस्थान ।
000

नाचीज़ बीकानेरी मो. 9680868028

Dilip Purohit
Author: Dilip Purohit

Group Editor