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Saturday, October 24, 2026, 6:25 pm

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Lifestyle

नाचीज बीकानेरी की राजस्थान दिवस पर रोज पढ़िए एक कविता

(नाचीज बीकानेरी वरिष्ठ साहित्यकार हैं। आप बीकानेर के निवासी हैं और बीकानेर में रहकर ही साहित्य साधना कर रहे हैं। आपकी कई रचनाएं राष्ट्रीय पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित होती रहती है। आपकी कई पुस्तकें प्रकाशित हो चुकी है और कई सम्मान भी मिल चुके हैं। आप राजस्थान दिवस तक रोज एक कविता राइजिंग भास्कर के पाठकों के लिए लिख रहे हैं। आज पेश है- राजस्थानी गीत म्हारो ब्याव करा दो नीं )

“म्हारो ब्याव करा दो नीं “

म्हारो ब्याव करा दो नीं
म्हारो ब्याव करा दो नीं
सुनो सुनो म्हारो आंगण
बैंड बजा दो नीं…….!
म्हारो ब्याव करा दो नीं
म्हारो ब्याव करा दो नीं ….।

सरबाळो बण घणै कोड सूं
आगै आगै रैऊं हूं
मजा मस्करय्यां म्हैं सूं कर
म्हारी सगययां म्हनैं, काळी कुत्ती परणावै है
काळी कुत्ती कांई परणावो ,
थे म्हनैं थांरी छोरी थे परणा दो नीं ……!
म्हारो ब्याव करा दो नीं
म्हारो ब्याव करा दो नीं ….

साथीडां रा छोरा-छोरी
पापा-पापा जद कैव्वै
हिंयों हिलोळा लेवै म्हारो
चर मर-चर मर जी करै
पापा पापा कांई करो थे, म्हनैं
बाबोजी कै बतळावो नीं…..!
म्हारो ब्याव करा दो नीं
म्हारो ब्याव करा दो नीं ….

काळजियै में हूक उठै, जद
भातो ले जावंती नैं देखूं हूं
म्हैं भी घुंघटियै रो पट
कद जाणै ,कद खोलूं लो
छोटी-मोटी ,काळी कोजी
जो चावो परणा दो नीं…..!!!
म्हारो ब्याव करा दो नीं
म्हारो ब्याव करा दो नीं
000
नाचीज बीकानेरी
मो.9680868028

Dilip Purohit
Author: Dilip Purohit

Group Editor