कवयित्री : पूजा अग्रवाल
जीवन एक मंच है
“जीवन एक मंच है
रंगों का उमंगों का
प्रेम-प्रीत का
स्नेह का अतरंगों का
किरदार यहाँ सलौने हैं
कुछ दिल के धनी
कुछ कुछ बौने हैं
जीवन एक रंग मंच है
रिश्तों का जहाँ मेला है
फिर भी हर एक अकेला है l
उम्र के हर पड़ाव पर
एक रहस्यमयी रोल है
जिसमे हर शख्स अनमोल है
तालियाँ वो पाता है
जो अपना किरदार
बखूबी निभाता है
शौहरत तब आंकी जाती है
जब हर खासो-आम
उसके आगे सर झुकाता है
जीवन एक मंच है
किसका यहाँ क्या मेल है
सब कर्म और भाग्य का खेल है
संवाद बस हम कहते हैं
‘कथानक’…
कहीं और लिखा जाता है
पात्र बदलते हैं वक्त के साथ
सांसों के साथ
पर्दा भी गिर जाता है
जीवन एक मंच है l”
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