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Saturday, April 5, 2025, 5:25 am

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ज़हीन, डॉ. आचार्य एवं स्वर्णकार को नरपत सिंह सांखला साहित्य-सम्मान अर्पित हुआ

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कविता और सामाजिक यथार्थ के बीच गहरा सबंध है : कमल रंगा

राखी पुरोहित. बीकानेर

हिन्दी-राजस्थानी के प्रसिद्ध साहित्यकार कीर्तिशेष नरपत सिंह सांखला की चौथी पुण्यतिथि के अवसर पर सांखला साहित्य सदन में त्रिभाषा काव्य-गोष्ठी एवं नरपत सिंह सांखला साहित्य-सम्मान समारोह का आयोजन वरिष्ठ साहित्यकार कमल रंगा की अध्यक्षता में हुआ।

संस्था के संस्थापक, समन्वयक, शिक्षाविद्-कवि संजय सांखला ने बताया कि अपने अध्यक्षीय उद्बोधन में कमल रंगा ने कहा कि नई कविता सामाजिक यथार्थ तथा उसमें व्यक्ति की भूमिका को परखने का उपक्रम है। इसके कारण ही नई कविता और सामाजिक यथार्थ के बीच गहरा संबंध हैं। इस कसौटी पर आज की त्रिभाषा काव्य-गोष्ठी सकारात्मक पहल है।

रंगा ने आगे कहा कि नई कविता की यथार्थवादी दृष्टि सिर्फ काल्पनिक-आदर्शवादी न होकर जटिल जीवन मूल्यों के साथ मानव की वेदना-संवेदना की सूक्ष्म पड़ताल करती है। आज तीन भाषाओं की रंगत को शब्द की संगत के साथ बुनियाद हुसैन ज़हीन, डॉ. कृष्णा आचार्य एवं राजाराम स्वर्णकार को सुनना एक सुखद पहलू रहा। संस्थान के सचिव वरिष्ठ शायर कासिम बीकानेरी ने इस अवसर पर कीर्तिशेष नरपत सिंह सांखला के व्यक्तित्व और कृतित्व पर प्रकाश डालते हुए उन्हें बहुभाषी प्रतिभावान साहित्यकार बताते हुए कहा कि उन्होंने साहित्य के अलावा शिक्षा एवं समाज सेवा के क्षेत्र में भी अपनी महत्वपूर्ण एवं रचनात्मक भूमिका का निवर्हन किया था।

संस्था समन्वयक सजंय सांखला ने बताया कि इस अवसर पर उर्दू के वरिष्ठ शायर बुनियाद हुसैन ज़हीन ने अपनी एक से एक उम्दा गज़ल प्रस्तुत कर उनके शानदार शेर पर दाद बटौरी। ज़हीन ने अपने शेर-मेरे वजूद से क्यूं बार-बार डरता है/मुहब्बत को भी मैला करोगे/यकीं नजदीकियों का हो रहा है/तसल्ली है कि अब धोखा करोगे आदि शेर रखे। इसी कड़ी में वरिष्ठ कवयित्री डॉ. कृष्णा आचार्य ने राजस्थानी कि मठौठ के साथ अपनी नई कविताओं एवं नव गीतों की मधुर कंठ से प्रस्तुति देकर श्रोताओं को आनन्दित कर दिया। आपने जीवन समाज के साथ ऐतिहासिक स्तर पर नारी के समर्पण को समेटते हुए-म्है राजस्थानी री/मेंहंदी अर लुगाया री/टांको टांकण वाळी/प्रीत रा परिंदा/भाइपो बध जासी आदि कई रंग की रचनाएं प्रस्तुत की। त्रिभाषा काव्य-गोष्ठी में हिन्दी के वरिष्ठ कवि राजाराम स्वर्णकार ने हिन्दी के सौन्दर्य के साथ अपनी कविता, गीत, गज़ल आदि काव्य की कई उपविधाओं के रंग बिखेरते हुए श्रोताओं से रागात्मक रिश्ता जोड़ा। स्वर्णकार ने मिलन ऋतु आई रे/गहरी संवेदना जगाओ/बोल मिट्ठू राम राम/राजा अंगार से श्रृंगार है इंसान/इससे बड़ा मजा आता है/शब्दों से पूजा भाव रखने वाली कविता आदि प्रस्तुत की। समारोह का संचालन करते हुए कवि गिरिराज पारीक ने संस्था की गतिविधियों एवं आयोजन की महत्ता पर प्रकाश डालते हुए कीर्तिशेष सांखला के कई अनछुए पहलुओं को साझा किया। इस अवसर पर साहित्यकार सम्मान-समारोह के तहत तीनों भाषाओं के रचनाकारों यथा बुनियाद हुसैन ज़हीन, राजाराम स्वर्णकार एवं डॉ. कृष्णा आचार्य का समारोह के अध्यक्ष कमल रंगा एवं संस्था के संजय सांखला व कासिम बीकानेरी ने माला, शॉल, दुपट्टा, प्रतीक चिह्न, उपहार आदि अर्पित कर उनका नरपत सिंह सांखला साहित्य-सम्मान किया।
इस विश्ेाष समारोह में जाकिर अदीब, डॉ. अजय जोशी, इन्द्रा व्यास, राजेन्द्र जोशी, बी.एल. नवीन, शहीद अहमद, प्रेम नारायण व्यास, भवानी शंकर, यशस्वी हर्ष, डॉ. मोहम्मद फारूक चौहान, शक्कूर बीकाणवी, हरिकिशन व्यास, देवी चन्द्र पंवार, गंगाबिशन बिश्नोई, हीरालाल, देवीलाल, नरेन्द्र कटारिया सहित कई गणमान्य एवं काव्य रसिकों की गरिमामय साक्षी रही। अंत में सभी का आभार डॉ. अजय जोशी ने ज्ञापित किया।

Rising Bhaskar
Author: Rising Bhaskar


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