…नारी शक्ति के बिना सृष्टि की कल्पना दुर्लभ है। शारदीय नवरात्रि के अंत में दशमी के दिन रावण का पुतला दहन कर दशहरा मनाया जाता है और चैत्र नवरात्रि के नवमी पर राम जी के जन्म दिवस को रामनवमी के रूप में मनाया जाता है।…
आलेख : डॉ. सीमा दाधीच, लेखिका और वरिष्ठ स्तंभकार
चैत्र नवरात्रि की पहचान भगवान श्रीराम के जन्मोत्सव से भी है। वैसे तो नवरात्रा के नौ दिन शक्ति की पूजा के लिए यानी मां भगवती दुर्गा की पूजा के लिए समर्पित है, लेकिन नवरात्रि के आखरी दिन नवमी को मर्यादा पुरूषोतम श्रीराम का जन्मोत्सव होने के कारण नवरात्रि में राम नवमी का विशेष महत्व माना जाता है। माता कौशल्या ने चैत्र (मार्च-अप्रैल) के चंद्र चक्र के उज्ज्वल आधे (शुक्ल पक्ष) के नौवें दिन राम को जन्म दिया, यह दिन चैत्र माह की शुक्ल पक्ष के नवमी तिथि को भगवान विष्णु ने प्रभु श्री राम के रूप में धरती पर अपना सातवां अवतार लिया था, जिसे राम नवमी के रूप में जाना जाता है। वैसे तो नवरात्रि का त्योहार साल में चार बार आता है, लेकिन आम जनता हिन्दू कैलेंडर के अनुसार चैत्र और अश्विन महीने में आने वाली शारदीय नवरात्रि मनाते हैं। जो ऋतु परिवर्तन को भी दर्शाता है।
शारदीय नवरात्रि और चैत्र नवरात्रि में देवी उपासक कुछ अंतर करते हैं उनके अनुसार शारदीय नवरात्रि को शक्ति-उपासना के रूप में देखते है और चैत्र नवरात्रि सिद्धि प्राप्ति के लिए मानी जाती है।
आम लोग चैत्र और अश्विन माह में आने वाली शरद (शारदीय) नवरात्रि में ही उपासना करते हैं। वहीं गुप्त नवरात्रि देवी की साधना और तंत्र ज्ञान की वृद्धि के लिए होती हैं। पौष नवरात्रि को शाकंभरी नवरात्रि के नाम से भी जाना जाता है।
शारदीय नवरात्रि का संबंध महिषासुर के संहार और राम द्वारा रावण वध से जुड़ा है तो वहीं चैत्र नवरात्रि में देवी की साधना की जाती है। दोनों ही नवरात्रि का सीधा संबंध मर्यादा पुरुषोत्तम श्रीराम से है एक नवरात्रि उनके जन्म से जुड़ी है तो दूसरी माता का आशीर्वाद लेकर कार्य सिद्धि और बुराई पर अच्छाई की जीत से जुड़ी है। सृष्टि की रचना का आरंभ भी चैत्र मास की प्रथमा से हुआ इसलिए ही हिंदू नव वर्ष का प्रारंभ मानते हैं।
माता भगवती के संबंध में भगवान आदिशंकराचार्य विरचित-विश्व साहित्य के अमूल्य एवं दिव्यतम ग्रन्थ ‘सौन्दर्य लहरी’ में माता पार्वती के पूछने पर भगवान शंकर ने नवरात्रि का परिचय इस प्रकार दिया हैं। नवशक्ति भिः संयुक्तम नवरात्रंतदुच्यते। एकैवदेव देवेशि नवधा परितिष्ठता’ अर्थात् नवरात्रि नौ शक्तियों से संयुक्त है। नवरात्रि के नौ दिनों में प्रतिदिन एक शक्ति की पूजा का विधान है। सृष्टि की संचालिका कही जाने वाली आदिशक्ति की नौ कलाएं (विभूतियां) नवदुर्गा कहलाती हैं। ‘मार्कण्डेय पुराण’ में नवदुर्गा का शैलपुत्री जो अपने भक्त को खुद से खुद की पहचान कराती है, माता का दूसरा रूप अनुशासन सिखाती हैं बह्मचारिणी,मन को मजबूत बनाती हैं मां चंद्रघंटा, ऊर्जा का पाठ पढ़ाती हैं मां कूष्मांण्डा, स्कंदमाता प्रेम की सौगात देती हैं ,अन्याय से लड़ना सीखना है तो मां कात्यायनी की आराधना करे , हिम्मत देती हैं मां कालरात्रि, मन को सुंदर बनाती हैं महागौरी , और सिद्धिदात्री की आराधना सच के रास्ते पर चलना बताती हैं। इस प्रकार माता के 9 दिन माता का ध्यान कर जीवन में नारी शक्ति के महत्व को समझा जा सकता है नारी शक्ति के बिना सृष्टि की कल्पना दुर्लभ है। शारदीय नवरात्रि के अंत में दशमी के दिन रावण का पुतला दहन कर दशहरा मनाया जाता है और चैत्र नवरात्रि के नवमी पर राम जी के जन्म दिवस को रामनवमी के रूप में मनाया जाता है।
चैत्र नवरात्रि को नववर्ष के रूप में मनाया जाता है यह हिंदू नववर्ष है, इसलिए इस अवसर पर देवी दुर्गा की पूजा करके भक्त नव वर्ष का प्रारंभ करते हैं। नवरात्रि का आरंभ हिन्दू पंचांग के अनुसार चैत्र मास के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा से होता है और यह नौ दिनों तक चलता है।
चैत्र माह हिंदी कैलेंडर के अनुसार साल का पहला महीना होता है, इसी महीने भगवान राम का जन्म हुआ था। दोनों ही नवरात्रि भले ही मां दुर्गा को समर्पित मानी जाती हैं लेकिन दोनों का संबंध भगवान राम से भी है। मर्यादा पुरुषोत्तम से जन्म और विजयोत्सव के रूप में नवरात्रि का आयोजन होता है।
इस दौरान देवी मां की उपासना के साथ व्रत, पूजन और हवन का विशेष महत्व होता है। चैत्र नवरात्रि गर्मी के मौसम के आगमन का प्रतीक है, साल में दो बार आने वाली नवरात्रि, मौसमों के संक्रमण काल में आती है। इस समय बीमार पड़ने की संभावना ज़्यादा होती है,इसलिए ऋषि-मुनियों ने धार्मिक अनुष्ठान के साथ नौ दिनों तक व्रत-उपवास रखने का प्रावधान किया। नौ दिनों तक फलाहार करके उपवास करने से शरीर से रोग-विकार निकल जाते हैं। भारत की मिट्टी से मां दुर्गा का रूप निखरता है और यहां देश भर में सबसे ज्यादा जोर-शोर से मां भगवती की उपासना की जाती है। कहते हैं मां में अपार शक्तियां समाई हैं। जिसे देवता नहीं हरा पाए, उसे मां ने अकेले अपने दम पर हराया और दुर्गा कहलाईं। 9 दिनों में घर-घर कन्या पूजन का भी किया जाता हैं और यह भी माना जाता है कि हर स्त्री में माता दुर्गा का रूप बसता है। शारदीय नवरात्रि की दशमी तीथि को भगवान राम ने रावण का वध किया था और धर्म की विजय प्राप्त की थी। कहा जाता है कि भगवान राम ने भी लंका विजय के लिए मां दुर्गा की आराधना की थी। माता भगवती के आराधना से ही श्री राम को विजय प्राप्त हुई।
